विरह-माधुरी

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रेम रस मदिरा की 21 माधुरियों में विरह-माधुरी क्रमांक 19 पर है। इसमें 214 पद हैं। मूल पद और उपलब्ध पुस्तक-स्रोत हिन्दी भावार्थ पढ़ें।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की मूल प्रकाशित रचना। साथ में उपलब्ध गुटका में राधा गोविन्द समिति द्वारा प्रकाशित आठवें संस्करण की तिथि 15 जुलाई 2011 दी गई है। प्रकाशन का इतिहास और स्रोत प्रमाण · आधिकारिक पुस्तक सूची। यहाँ मूल पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोतों से लिप्यंतरित हैं; नए पद या भावार्थ नहीं रचे गए हैं।
- पद 1 · अँखियाँ झर-झर लागीं बरसन।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 2 · अँखियाँ, श्याम-प्रेम-रस माती।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 3 · अँखियाँ, सखि! या रूप लुभानी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 4 · अब रही न काहू काम की।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 5 · अरी कोउ, उर उरझी सुरझावे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 6 · अरी! कोउ विरहिनि बाट बतावे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 7 · अरी तोय कहा भयो!"कछु नाहिं"।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 8 · अरी मैं, मरी हरी बिनु हाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 9 · अरी सखि!, पिय सँग नींद गई।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 10 · अरी सखि!, प्राण कंठ चलि आय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 11 · अरी सखि!, प्रीति न करियो कोय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 12 · अरी सखि!, मति तोरी भरमाई।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 13 · अरी सखि! मन मेरो कहुँ जात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 14 · अरी सखि! सिगरो जग बौराई।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 15 · अरे मन, मोहन सों बचि रहियो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 16 · अहो प्राणेश्वर! प्राणाधार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 17 · अहो हरि! अब न विरह सहि जात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 18 · आय नहिं, माधव माधव आय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 19 · आय री, दृग बरसावन सावन।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 20 · ऊधो!, ऐसेहिं कहियो कान्ह।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 21 · ऊधो! कहा कहौं तिन काहिं।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 22 · ऊधो! कहि दीजो उन जाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 23 · ऊधो! कहि दीजो बलभ्रात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 24 · ऊधो! कहि दीजो यह तात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 25 · ऊधो! कहि दीजो संदेश।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 26 · ऊधो!, कहियो उन घनश्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 27 · ऊधो!, कहियो उन चितचोर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 28 · ऊधो!, कहियो उन नँदलाल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 29 · ऊधो!, कहियो उन भगवान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 30 · ऊधो!, कहियो कृपानिधान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 31 · ऊधो!, कहियो नंदकुमार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 32 · ऊधो!, कहियो श्याम सुजान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 33 · ऊधो!, कहियो श्यामलगात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 34 · ऊधो!, कहियो हरि समुझाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 35 · ऊधो!, कहु कब ते अज्ञान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 36 · ऊधो!, कह्यो इहै बलभाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 37 · ऊधो!, जनि कहियो कछु कान्ह।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 38 · ऊधो!, जाय कह्यो तुम वाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 39 · ऊधो!, तजु अद्वैत विचार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 40 · ऊधो!, तुम अज्ञान निधान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 41 · ऊधो!, तुम आये सोइ देश।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 42 · ऊधो!, तुम दोउन इकसार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 43 · ऊधो!, तुम नहिं जानत ज्ञान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 44 · ऊधो!, तुमहिं ज्ञान को ज्ञान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 45 · ऊधो!, तुमहिं शब्द को ज्ञान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 46 · ऊधो!, दोष न कछु उन आय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 47 · ऊधो!, धनि तव ज्ञान प्रचार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 48 · ऊधो!, धनि तव ज्ञान विचार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 49 · ऊधो!, धन्य तुम्हारो ज्ञान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 50 · ऊधो!, धन्य हमारो भाग।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 51 · ऊधो!, बलिहारी येहि ज्ञान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 52 · ऊधो!, भली करी तुम आये।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 53 · ऊधो!, माधो की गति न्यारी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 54 · ऊधो!, मैया सों कहियो जाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 55 · ऊधो!, यह कहियो संदेश।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 56 · ऊधो!, यह रहस्य की बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 57 · ऊधो!, यह वेदांत विचार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 58 · ऊधो!, इहै ज्ञान को सार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 59 · ऊधो!, वे सब जानन हार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 60 · ऊधो सरस प्रेम रस पाये।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 61 · ऊधो!, सुनु चारिहुँ श्रुति सार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 62 · ऊधो!, सुनु सूधो सो ज्ञान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 63 · ऊधो!, हम अबला ब्रजनार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 64 · ऊधो!, हम जानति सब बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 65 · ऊधो!, हम पूछति इक बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 66 · ऊधो!, हम भोरी ब्रजनार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 67 · ऊधो!, हम मतिमंद गमार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 68 · ऊधो!, हमरे आँखि न कान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 69 · ऊधो!, हम सूधी ब्रज-बाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 70 · ऊधो!, हरि सों कहियो जाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 71 · ऊधो!, हैं माधो करतार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 72 · ऊधो!, हैं माधो ठगहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 73 · ऊधो!, ह्वै गये प्रेम अधीर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 74 · ओझाई करि ओझा गये हार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 75 · कबहुँ जनि, कारेन कोउ पतियाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 76 · करहु जनि, कारेन की कछु बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 77 · करी का, ना जाने वाने।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 78 · कहत हरि, सुनु सब ब्रज बनितान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 79 · कहा सखि! कबहुँ न अइहैं श्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 80 · कहो पिय!, किन तोहिं रसिक बनायो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 81 · कान्ह की बात रही अब कान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 82 · कान्ह बिनु, कैसे राखूँ प्रान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 83 · किये इन नैनन बंटाढार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 84 · किशोरी पद किंकर श्याम सुजान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 85 · कुँवरि!, तू कितै गई डरपाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 86 · कौन यह, विरह बनायो हाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 87 · क्यों पिय!, इतनो इतराय रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 88 · क्यों बात बनावति नागरी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 89 · क्रूर!, तू कत अक्रूर कहाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 90 · क्रूर वह विधि या यह अक्रूर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 91 · गये कित, गोधन तजि गोपाल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 92 · गये कित, गोपन तजि गोपाल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 93 · गये कित, प्रियतम नंदकुमार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 94 · गये हम, इन नैनन ते हार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 95 · गयो लै, प्रान प्रान को प्रान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 96 · गयो सखि!, चतुरानन सठियाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 97 · चलन चह, तनु तजि मथुरा प्रान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 98 · चल्यो कित, लै प्रानन अक्रूर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 99 · छिनहिं छिन नैनन नीर भरे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 100 · छीनि लइ, इन नैनन मन चैन।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 101 · छोरि सखि! लै गयो मम सिंदूर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 102 · जियत न मरत न जिय तन भात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 103 · तजन को, जाय न सहज सुभाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 104 · तजी क्यों, प्रियतम ब्रज बनितान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 105 · दई! मोहिं, दई पीर बेपीर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 106 · दृग-पट मुकुट लटक पे अटकि गयो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 107 · देखु सखि!, आई ऋतु बरसात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 108 · धन्य चोर सिरमोर, मोर प्रिय,मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 109 · धीर अब, कैसेहुँ नाहिं बँधात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 110 · न जावो, मथुरा! प्राणाधार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 111 · न लेजा रे, मम प्रानन-प्रान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 112 · नहिं आये प्रियतम हाय! रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 113 · निठुर मोहिं, दै गयो विरह अपार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 114 · पथिक तुम, इतनो कहियो जाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 115 · पपिहरा, पापी मोहिं सताय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 116 · पिय आवन कहि गये, आये ना।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 117 · पिय बिनु, कैसेहुँ जिय नहिं चैन।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 118 · पिय बिनु, मो कहँ कछु न सुहाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 119 · पिय बिनु, प्यारी गइ बौराय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 120 · पिरोवति राधा अँसुवन हार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 121 · पुनि शरत-पूर्णिमा आ गई।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 122 · प्राण हित, पावस-ग्रीषम धायो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 123 · बताओ सखि!, कैसे धरूँ मैं धीर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 124 · बलि जाउँ कपट चटसार की।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 125 · बार इक, आओ प्राणाधार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 126 · वीर! हौं, धरौं कौन विधि धीर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 127 · बेदरदी! क्यों इतनो इतरात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 128 · बैरी बसंत, सखी! पुनि आयो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 129 · भये द्वै दिन के, कै ह्वै हाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 130 · भयो सखि!, अब सो सुख सपनो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 131 · भ्रमर! तू, जनि गुन-गुन गुंजार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 132 · भ्रमर! तू, वृथा करत मनुहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 133 · मन भावन सावन आय रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 134 · माधव!, अब न, तुमहिं पतियाउँ।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 135 · माधो! गये देन भल ज्ञान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 136 · माधो! जाउँ तुमहिं बलिहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 137 · माधो! तुम पूरे ठगहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 138 · माधो! तुम मोहिं भले पठाये।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 139 · माधो! धन्य धन्य ब्रजनार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 140 · माधो! पुरवहु मम अभिलास।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 141 · माधो! भल पठयो संदेश।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 142 · माधो! मानि लई हम हार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 143 · माधो! मोहिं पठयो वोहि देस।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 144 · माधो! मोहिं लूटीं ब्रजनार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 145 · माधो! हम मानत आभार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 146 · मुझ विरहिनि को विरह सतावे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 147 · मैं कैसी करूँ, मोहिं कछू ना भाये।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 148 · मो सम कौन अभागिनि मात?।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 149 · यह मौन काल ली, का लली?।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 150 · रहत इन, नैनन नित बरसात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 151 · रही सखि!, बात तोर या मोर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 152 · रैन-दिन तलफि रहे दोउ नैन।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 153 · रैन-दिन, नैनन चैन परै न।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 154 · रैन-दिन नैनन नीर ढरे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 155 · रैन-दिन विरहिनि तलफत जात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 156 · लखी पिय, जा दिन मृदु मुसकाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 157 · लखी सखि! जब ते सुंदर-श्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 158 · लखो जनि!, कान्ह की मुसकान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 159 · लगी री मोहिं, श्याम-दृगन की चोट।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 160 · लाग उर, हाय विरह की आग।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 161 · लाल को, जाल भली मैं जानी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 162 · वियोगिनि, अँसुवन हार पिरोय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 163 · विरह दुख, कहि न जाय सहि जाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 164 · श्याम! अब बेगि बचावो जी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 165 · श्याम कत, एतिक भये कठोर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 166 · श्याम बिनु, भई श्याम हौं वीर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 167 · श्याम! हौं योगिनि भेष बनैहौं।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 168 · श्रीराधे! तोरे कौन बलाय लगी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 169 · सखन इक, पाती लिखी बनाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 170 · सखिन तनु, बिनु प्रियतम पियरान।मूल पद · हिन्दी भावार्थ अनुपलब्धइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 171 · सखि, पुनि वरषा ऋतु आ गई।मूल पद · हिन्दी भावार्थ अनुपलब्धइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 172 · सखी! इन, अँखियन कछु न लखाय।मूल पद · हिन्दी भावार्थ अनुपलब्धइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 173 · सखी इन, अँखियन को समुझाय।मूल पद · हिन्दी भावार्थ अनुपलब्धइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 174 · सखी! इन कानन का न करी।मूल पद · हिन्दी भावार्थ अनुपलब्धइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 175 · सखी! इन नैनन कहा करूँ?।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 176 · सखी कोउ, कोउ उपाय बतराय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 177 · सखी! कोउ, देउ वैद बुलवाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 178 · सखी! तोय, योग, वियोग कि दोय?।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 179 · सखी! तोय, काउ की दीठि लगी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 180 · सखी! पिय, अतिशय सरल सुभाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 181 · सखी! मैं, भई अंध अनुहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 182 · सखी! मैं, सुनी कालि इक बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 183 · सखी! मोहिं, चन्द्रकिरन तड़पाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 184 · सखी! मोय, भयो विधाता बाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 185 · सखी! मोहिं, होत न अस विश्वास।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 186 · सखी! यह, बड़ अचरज मोहिं आवत।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 187 · सखी! ये, अँखियाँ गई पथराय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 188 · सखी! ये, कानन बहुत बुरे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 189 · सखी! ये, कारे सब ठगहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 190 · सखी! ये, दृग न दृगन सुख पाये।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 191 · सखी! शशि, किरन अगिनि तनु लायो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 192 · सखी! सुनु, अस मम उर परतीति।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 193 · सखी! सुनु, समय होत बलवान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 194 · सखी! हम, इन पाँचन ते हारे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 195 · सताये, शशि सिगरी निशि हाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 196 · सवतिया निंदिया मोहिं सताये।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 197 · सहि जाय विरह नहिं हाय रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 198 · सुनी इन, कानन जब ते तान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 199 · सुनी सखि! जा दिन ते मृदु बैन।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 200 · सुनी सखि!, जा दिन ते पिय बैन।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 201 · सुनी सखि, है कोउ इक भगवान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 202 · सुरति नहिं, बिसरति सुंदर-श्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 203 · हमारो, जीवन-धन-घनश्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 204 · हमारो सहज सनेही श्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 205 · हमें बस, एक श्याम सों काम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 206 · हाय दई, यह कैसी भई री।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 207 · हाय पिय, देइहैं अस बिसराय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 208 · हाय मोरा, पिया बिनु जिया घबराये।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 209 · हाय! मोहिं पल छिन विरह सतावत।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 210 · हाय! मोहिं, पिय बिनु कछु न सुहाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 211 · हाय यह, कैसी लागि बलाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 212 · हाय! सखि, कैसे ह्वै गये श्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 213 · हाय! हिय, कैसो तव अक्रूर!।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 214 · हो रसिया! कस सुरति बिसारी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें