लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
RADHEY RADHEY

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

प्रेम रस मदिरा

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज रचित 21 माधुरियों में 1,008 भक्ति पदों का संग्रह। ब्रज भाषा के इन गेय पदों में राधा-कृष्ण की लीलाएँ, निष्काम प्रेम, विरह, दैन्य और भक्ति का वर्णन है। माधुरी चुनें और मूल पद तथा उपलब्ध हिन्दी भावार्थ पढ़ें।

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की मूल प्रकाशित रचना। साथ में उपलब्ध गुटका में राधा गोविन्द समिति द्वारा प्रकाशित आठवें संस्करण की तिथि 15 जुलाई 2011 दी गई है। प्रकाशन का इतिहास और स्रोत प्रमाण · आधिकारिक पुस्तक सूची। यहाँ मूल पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोतों से लिप्यंतरित हैं; नए पद या भावार्थ नहीं रचे गए हैं।

इस लिप्यंतरण में मूल स्रोत-संदर्भ और पदों के स्थायी लिंक सुरक्षित हैं। स्रोत और संशोधन टिप्पणियाँ पढ़ें।

इंटरैक्टिव पुस्तक खोलें
प्रभात में कमलों से भरी नदी और फूलों वाले ब्रज-उपवन के पास खुली पांडुलिपि, बाँसुरी और मोरपंख
प्रेम रस मदिरा के लिए एआई से निर्मित चित्र; प्रकाशित पुस्तक का चित्र नहीं।

माधुरी अनुक्रमणिका

चित्र एआई से निर्मित हैं; पद प्रकाशित पुस्तक से हैं।

  1. सूर्योदय में वटवृक्ष के नीचे रिक्त गुरु-आसन की सीढ़ियों के पास हाथ जोड़कर बैठा भक्तसद्गुरु-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  2. राधा-कृष्ण के पुष्प-सजे मंदिर के सामने हाथों में आरती-दीप और जल पर झिलमिलाता स्वर्णिम प्रकाशआरती-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  3. खुली अलिखित पुस्तक, दर्पण और दीप के पास बैठी साधिका; नीले पर्वतों से प्रकाशमय महल की ओर जाता स्वर्णिम पथसिद्धान्त-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  4. वर्षा और उषा के प्रकाश में कमल के पास घुटनों पर बैठी भक्त; बादलों में करुणा से हाथ बढ़ाते श्रीकृष्ण की कल्पित छविदैन्य-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  5. पुष्प-सजे झूले पर राधा-कृष्ण और सखियाँ; पीछे नदी, मंदिर, ब्रज की गलियाँ और मोरों से भरा कल्पित धामधाम-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  6. स्वर्णिम जलधारा में दो बड़े गुलाबी कमल और पुष्पवृक्ष के नीचे बैठे राधा-कृष्ण, रंगीन काँच जैसी चमक मेंप्रेम-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  7. गोकुल के आँगन में उलटी माखन-मटकी और बछड़े के पास मुस्कराते बालकृष्ण; द्वार से देखती यशोदा, मुलायम खिलौने जैसी कला मेंश्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  8. फूलों से सजे बरसाना के आँगन में रंगीन गेंद के साथ खेलती बालराधा और छोटी सखियाँ, परतदार कागज़ जैसी कला मेंश्री राधा-बाल लीला-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  9. चाँदनी में कदंबवृक्ष के नीचे बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण; नदी के किनारे मोर, कमल और दूर मंदिरश्रीकृष्ण-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  10. गुलाबी घूँघट और पुष्पाभूषणों में शांत श्रीराधा; चमेली की लताओं के पीछे जल, मोर और उषा का प्रकाशश्रीराधा-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  11. नदी किनारे फूलों से भरे वृक्ष के नीचे बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण और उनकी ओर देखती राधा; हिरण और हंस, बुने वस्त्र जैसी कला मेंयुगल-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  12. पुष्पों से भरे ब्रज-कुंज में राधा को माला पहनाने की चंचल लीला करते श्रीकृष्ण; चारों ओर सखियाँ और उड़ती पंखुड़ियाँलीला-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  13. आठ सखियाँ रंग-बिरंगे वस्त्रों में पुष्पमालाएँ गूँथती हुईं; पास फूलों की टोकरियाँ और पीछे कमल-सरवरमहासखी-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  14. चाँदनी में चमेली की लताओं के बीच पुष्प-सजे झूले पर राधा-कृष्ण; नीचे कमल-सरवर और हंसनिकुंज-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  15. उषा में कमल-सरवर के पास पुष्पों की मेहराब के नीचे एक-दूसरे की ओर आते राधा-कृष्ण, हल्के जलरंग जैसी कला मेंमिलन-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  16. पुष्पवृक्ष के नीचे मुख फेरकर बैठी राधा को फूल अर्पित करते श्रीकृष्ण; पीछे सूर्यास्त में कमल-सरवरमान-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  17. चाँदनी में बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण से निकलती कल्पित स्वर्णिम ध्वनि-लहरें; वन में सुनते हिरण, मोर और पक्षीमुरली-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  18. ब्रज के आँगन में हँसते श्रीकृष्ण पर गुलाबी गुलाल उड़ाती राधा; सखियाँ, पुष्प-पंखुड़ियाँ और चमकीले रंग, गाढ़े रंग-लेप जैसी कला मेंहोरी-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  19. दीप के पास वर्षा-भीगी देहरी पर अकेली राधा; उनकी दृष्टि खाली पथ और दूर नील प्रकाश की ओरविरह-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  20. ब्रज के आँगन में ढोलक, मंजीरों और तालियों के साथ गाते-नृत्य करते ग्रामवासी, मिट्टी और नील रंग की लोक-छाप जैसी कला मेंरसिया-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  21. कमल, बांसुरी, वर्षा-मेघ, दीप, कुंज-पथ और राधा-कृष्ण को जोड़ती पुष्पमाला, रंगीन मोज़ेक जैसी कला मेंप्रकीर्ण-माधुरीपदों की अनुक्रमणिका देखेंइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें