लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
RADHEY RADHEY

आरती-माधुरी

राधा-कृष्ण के पुष्प-सजे मंदिर के सामने हाथों में आरती-दीप और जल पर झिलमिलाता स्वर्णिम प्रकाश
एआई से निर्मित चित्र

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रेम रस मदिरा की 21 माधुरियों में आरती-माधुरी क्रमांक 2 पर है। इसमें 3 पद हैं। मूल पद और उपलब्ध पुस्तक-स्रोत हिन्दी भावार्थ पढ़ें।

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की मूल प्रकाशित रचना। साथ में उपलब्ध गुटका में राधा गोविन्द समिति द्वारा प्रकाशित आठवें संस्करण की तिथि 15 जुलाई 2011 दी गई है। प्रकाशन का इतिहास और स्रोत प्रमाण · आधिकारिक पुस्तक सूची। यहाँ मूल पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोतों से लिप्यंतरित हैं; नए पद या भावार्थ नहीं रचे गए हैं।

  1. पद 1 · श्रीकृष्ण जी की आरतीमूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  2. पद 2 · युगल सरकार की आरतीमूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  3. पद 3 · श्री वृषभानुदुलारी की आरतीमूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें