आरती-माधुरी

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रेम रस मदिरा की 21 माधुरियों में आरती-माधुरी क्रमांक 2 पर है। इसमें 3 पद हैं। मूल पद और उपलब्ध पुस्तक-स्रोत हिन्दी भावार्थ पढ़ें।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की मूल प्रकाशित रचना। साथ में उपलब्ध गुटका में राधा गोविन्द समिति द्वारा प्रकाशित आठवें संस्करण की तिथि 15 जुलाई 2011 दी गई है। प्रकाशन का इतिहास और स्रोत प्रमाण · आधिकारिक पुस्तक सूची। यहाँ मूल पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोतों से लिप्यंतरित हैं; नए पद या भावार्थ नहीं रचे गए हैं।