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RADHEY RADHEY

धाम-माधुरी

पुष्प-सजे झूले पर राधा-कृष्ण और सखियाँ; पीछे नदी, मंदिर, ब्रज की गलियाँ और मोरों से भरा कल्पित धाम
एआई से निर्मित चित्र

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रेम रस मदिरा की 21 माधुरियों में धाम-माधुरी क्रमांक 5 पर है। इसमें 5 पद हैं। मूल पद और उपलब्ध पुस्तक-स्रोत हिन्दी भावार्थ पढ़ें।

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की मूल प्रकाशित रचना। साथ में उपलब्ध गुटका में राधा गोविन्द समिति द्वारा प्रकाशित आठवें संस्करण की तिथि 15 जुलाई 2011 दी गई है। प्रकाशन का इतिहास और स्रोत प्रमाण · आधिकारिक पुस्तक सूची। यहाँ मूल पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोतों से लिप्यंतरित हैं; नए पद या भावार्थ नहीं रचे गए हैं।

  1. पद 1 · चलो मन! श्री वृंदावन धाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  2. पद 2 · रसिक जन-धन गोवर्धन धाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  3. पद 3 · लखो रे मन, वृंदा विपिन-बहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  4. पद 4 · हमारो धन, श्री बरसानो धाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  5. पद 5 · हमारो माई, श्री बरसानो गाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें