सिद्धान्त-माधुरी

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रेम रस मदिरा की 21 माधुरियों में सिद्धान्त-माधुरी क्रमांक 3 पर है। इसमें 142 पद हैं। मूल पद और उपलब्ध पुस्तक-स्रोत हिन्दी भावार्थ पढ़ें।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की मूल प्रकाशित रचना। साथ में उपलब्ध गुटका में राधा गोविन्द समिति द्वारा प्रकाशित आठवें संस्करण की तिथि 15 जुलाई 2011 दी गई है। प्रकाशन का इतिहास और स्रोत प्रमाण · आधिकारिक पुस्तक सूची। यहाँ मूल पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोतों से लिप्यंतरित हैं; नए पद या भावार्थ नहीं रचे गए हैं।
- पद 1 · अचंभो इक देख्यो ब्रज माहिं।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 2 · अनजान मूढ़ मन मान रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 3 · अनोखो लख्यौं जगत व्यवहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 4 · अनोखो हरि तुम्हरो खिलवार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 5 · अमोलक रतन मिलत बिनु मोल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 6 · अरे मन! अबहुँ बात ले मान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 7 · अरे मन! अवसर बीत्यो जात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 8 · अरे मन! अस तृष्णा बलवान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 9 · अरे मन! इहै सार संसार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 10 · अरे मन! उभय रूप जग जान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 11 · अरे मन! काहे करत गुमान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 12 · अरे मन! चार दिना की बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 13 · अरे मन! तू निज स्वारथ साध।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 14 · अरे मन! तू मेरो मत मान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 15 · अरे मन! मनमोहन मन लाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 16 · अरे मन! मूरख निपट गँवार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 17 · अरे मन! यह ऐसो जग जान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 18 · अरे मन! यह जग एक सराय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 19 · अरे मन! यह जीवन दिन चार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 20 · अरे मन! यह संसार असार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 21 · अरे मन! सुन इक अटपट बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 22 · अरे मन! सुन उपनिषद विचार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 23 · अरे मन! सुन सूधी-सी बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 24 · अरे मन! हरि, हरिजन नहिं दोय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 25 · अरे मन! हौं मानत हौं हार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 26 · अरे मन! स्वारथ को संसार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 27 · अवध के राम बने ब्रज श्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 28 · आजु मन! देखहुँ शक्ति तिहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 29 · ओ मन! मूरख अब चेत रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 30 · कबै हरि हौं पैहौं ब्रजवास।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 31 · करहु बुधजन मन माहिं विचार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 32 · करो जनि मन! मनमानी काम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 33 · कहत हम खरी खरी कछु बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 34 · को कह राधे सम गिरिधारी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 35 · गये सब परमहंस बौराय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 36 · गयो ब्रज माहिं ब्रह्म बौराय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 37 · गहो रे मन! श्याम चरण शरणाई।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 38 · चपल चित! कत इत उत भटकात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 39 · चली हौं दुलहिनि बनि ससुरार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 40 · चलु प्रेम नगर की गैल रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 41 · चलो मन! गहवर कुंज लतान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 42 · छाँड़ि दे मन! अड़बंगी रीति।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 43 · छाँड़ु मन! ठगिनी माया आस।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 44 · छाँड़ु मन! सनक तनक सुनु बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 45 · छाँड़ु मन! जग मृगजल की आस।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 46 · जग गोरखधंधा जान रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 47 · जगत की बड़ी अनोखी बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 48 · जाउँ ब्रजनारिन की बलिहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 49 · जीव जड़ दे जड़ता अब छोड़।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 50 · जौहरी बन्यो सकल संसार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 51 · तजो रे मन! उन संतन को संग।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 52 · तजो रे मन! छनभंगुर वैराग।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 53 · तन यौवन धन दिन चार रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 54 · तुमहिं तजि नहिं चहिये गोलोक।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 55 · तू मन! मनमानी त्याग रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 56 · तोरि दिय तृण सम जग को नात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 57 · देहु हरि! यह झगड़ो निपटाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 58 · धन्य सोइ जोइ स्वारथ पहिचान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 59 · धरो मन! गौर-चरन को ध्यान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 60 · नाथ! मम तुम ही सोँ सब नात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 61 · नाथ सब अहइ तिहारेइ हाथ।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 62 · पड़ो सखि! नेम प्रेम झगड़ो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 63 · पिय मोल अमोलक लीजिये।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 64 · प्राणधन जीवन कुंज बिहारी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 65 · प्रीति की रीति न सखि सब जान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 66 · प्रीति सखि काको कहत बताय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 67 · काम प्रेम ना, प्रेम काम ना।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 68 · ब्रह्म तुम केहि बल पर इतरात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 69 · भजो मन! निशि दिन नंदकुमार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 70 · भजो रे मन! निशिदिन नंदकिशोर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 71 · मन! इक दिन ऐसा आयेगा।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 72 · मन! काहे करत गुमान रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 73 · मन! क्यों नहिं हरि गुन गा रहा।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 74 · मन! तू काहे हठ पकर्यो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 75 · माई री मैं तो! आजु परी निधि पाई।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 76 · मान मन! छाड़ु मान अपमान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 77 · मिलत नहिं नर तनु बारम्बार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 78 · मूढ़ मन! गूढ़ तत्व यह जान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 79 · मेरो मन गौर चरन अनुराग्यो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 80 · मोहिं मनमोहन मनभाय रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 81 · यह जग सेमर का फूल रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 82 · यह जोरी नीकी जान रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 83 · यह माया ठगिनी जान रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 84 · येहि जग की आशा छोड़ रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 85 · येहि जग मृगजल ज्योँ जान रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 86 · रटु निशिदिन राधे नाम रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 87 · रटो रे मन! छिन छिन राधे नाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 88 · रटो रे मन! छिन छिन श्यामा श्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 89 · रसिक जन गये फोरि सिर हार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 90 · रहु श्री बरसाने गाम रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 91 · रहो रे मन गौर चरन लव लाई।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 92 · रैन दिन झगरत नैनन प्रान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 93 · लख्यो जग इक अचरज की बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 94 · लख्यों मैं इक अचरज ब्रजधाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 95 · लख्योँ मैं इक अचरज संसार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 96 · लगति सखि अब ससुरारि पियारि।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 97 · लगे नहिं सगे तोर भगवान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 98 · लाल सम लालहिं निठुर कृपाल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 99 · श्याम! अब तुमहिं मान लो हार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 100 · श्याम तन भले भये घनश्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 101 · श्यामा श्याम शरण गहु रे मन!मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 102 · श्री राधेरानी प्रेम तत्व की सार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 103 · संत जन बारह मास बसंत।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 104 · सखी कोउ एक बात समुझाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 105 · सखी मन मरम न जाने कोय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 106 · सखी मोहिं प्रीति रीति समुझाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 107 · सखी मोहिं समुझावहु यह बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 108 · सखी यह कैसो है ब्रजधाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 109 · सखी सुनु इक कौतुक की बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 110 · सखी सुनु प्रेम नेम दोउ भाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 111 · सदा सोँ सोई दुलहिनि जाग।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 112 · संत गति मन बुधि नाहिं समात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 113 · सब झूठो जग व्यवहार रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 114 · सुन लाख टका की बात रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 115 · सुने हम समदर्शी भगवान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 116 · सुनो मन इक अनहोनी बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 117 · सुनो मन! एक अनोखी बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 118 · सुनो मन एक काम की बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 119 · सुनो मन! यह अनन्य की रीत।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 120 · सुनहु मन! यह ऐसो संसार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 121 · सुनो मन! यह वेदन को सार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 122 · सुनो मन! यह स्वरूप संसार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 123 · सुनो मन! श्रुति सिद्धांत विचार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 124 · सुनो मन! सबै श्रुतिन को सार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 125 · सुनो मन! सुख दुख नहिं संसार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 126 · सुनो सब एक अनसुनी बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 127 · सुनो सब जीव हमारी बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 128 · सुनो हरि! खरी खरी अब बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 129 · सोच मन! श्याम मिलन की बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 130 · हम चाकर उन ब्रज नारिनि के।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 131 · हम डरहूँ डर ते ना डरें।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 132 · हम भूखे ब्रज की गारी के।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 133 · हमारे मन भाई भानुलली।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 134 · हमारे, मन भायो ब्रजधाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 135 · हमें तो अली लली सोँ काम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 136 · हमें तो एक श्याम सों काम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 137 · हमें तो मिल्यो रतन अनमोल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 138 · हमें नहिं काहू सों कछु काम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 139 · हरि बिनु बिगरी नाहिं बने।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 140 · हृदय तू कुलिश कठोर लखात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 141 · हृदय तू मोरि सिखावनि मान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 142 · होति जग इक अनहोनी बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें