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RADHEY RADHEY

सिद्धान्त-माधुरी · पद 27

अवध के राम बने ब्रज श्याम।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: avadha ke rāma bane braja shyāma

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1अवध के राम बने ब्रज श्याम।

2लखन बने बलराम जानकी, राधारानी नाम।

3त्रेता में बड़भ्रात राम भये, द्वापर में बलराम।

4मुकुट, ग्रीव, कटि, पद टेढ़ो करि, प्रकटे चंचल राम।

5योगारूढ़ जीव हित कीन्ही, लीला रास ललाम।

6पग पलुटावति सदा जानकी, रामहिं येहि ब्रजधाम।

7इनमें भेद “कृपालु” मान जो, नरकहुँ नाहीं ठाम॥

हिन्दी भावार्थ

अयोध्या के भगवान राम ही ब्रज में श्याम बनकर प्रकट हुए। लक्ष्मण जी बलराम बन गये एवं श्री जानकी जी राधारानी के नाम से प्रख्यात हुई। त्रेता में बड़े भाई राम हुए एव द्वापर में बड़े भाई बलराम हुए। भगवान राम ब्रज में मुकुट गर्दन, कमर एवं पैरों को टेढ़ा करके चंचल स्वभाव से प्रकद हुए एवं मायातीत जीवों के लिये आदर्श स्थापित करते हुए दिव्य रासलीला का अभिनय किया। ब्रज में श्री जानकी जी रे भगवान राम से अपने चरण दबवाये। 'कृपालु' कहते हैं कि इन दोनों में जो भेदभाव रखता है वह नामापराधी है, उसको नरक में भी स्थान नहीं मिल सकता।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 81-82