# अवध के राम बने ब्रज श्याम।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0036-M03-K027
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: सिद्धान्त-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 27
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 20–20

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>अवध के राम बने ब्रज श्याम।  
<a id="line-2"></a>लखन बने बलराम जानकी, राधारानी नाम।  
<a id="line-3"></a>त्रेता में बड़भ्रात राम भये, द्वापर में बलराम।  
<a id="line-4"></a>मुकुट, ग्रीव, कटि, पद टेढ़ो करि, प्रकटे चंचल राम।  
<a id="line-5"></a>योगारूढ़ जीव हित कीन्ही, लीला रास ललाम।  
<a id="line-6"></a>पग पलुटावति सदा जानकी, रामहिं येहि ब्रजधाम।  
<a id="line-7"></a>इनमें भेद “कृपालु” मान जो, नरकहुँ नाहीं ठाम॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

अयोध्या के भगवान राम ही ब्रज में श्याम बनकर प्रकट हुए। लक्ष्मण जी बलराम बन गये एवं श्री जानकी जी राधारानी के नाम से प्रख्यात हुई। त्रेता में बड़े भाई राम हुए एव द्वापर में बड़े भाई बलराम हुए। भगवान राम ब्रज में मुकुट गर्दन, कमर एवं पैरों को टेढ़ा करके चंचल स्वभाव से प्रकद हुए एवं मायातीत जीवों के लिये आदर्श स्थापित करते हुए दिव्य रासलीला का अभिनय किया। ब्रज में श्री जानकी जी रे भगवान राम से अपने चरण दबवाये। 'कृपालु' कहते हैं कि इन दोनों में जो भेदभाव रखता है वह नामापराधी है, उसको नरक में भी स्थान नहीं मिल सकता।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 81-82

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
