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RADHEY RADHEY

सिद्धान्त-माधुरी · पद 127

सुनो सब जीव हमारी बात।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: suno saba jīva hamārī bāta

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1सुनो सब जीव हमारी बात।

2"यमेवैष वृणुते"मम वाणी, विश्व विदित विख्यात।

3याको अर्थ शरण ह्वै जोइ भज, सोइ मोहिं पाइ सकात।

4"गुह्याद् गुह्यतमं"गीता में, कह्यो गुप्त मत तात।

5ताको अर्थ इहै मन बुधि दै, भजहु मोहिं दिन रात।

6करहु “कृपालु” भजन तुम निशिदिन, देहु तर्क धरि पात॥

हिन्दी भावार्थ

भगवान् जीवों से कहते हैं कि हे जीवात्माओं! तुम आ हमारी बात सुनो! "यमेवैष वृणुते'यह मेरी वेद वाणी विश्वविदित है, जिसका वास्तविक अर्थ यह है कि जो जीव मेरी शरण होकर मेरी भक्ति करता है वही मुझे प्राप्त कर सकता है। और मैंने गीता में जो अत्यन्त गुप्त मत अर्जुन को बताया है उसका भी भाव यही है कि जो मन बुद्धि का समर्पण करके मेरी भक्ति करता है, मैं उसी पर कृपा करता हूँ। 'कृपालु' कहते हैं कि अब तुम निरन्तर भजन करो, तर्क कुतर्क समाप्त कर दो।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 161