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RADHEY RADHEY

सिद्धान्त-माधुरी · पद 137

हमें तो मिल्यो रतन अनमोल।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: hameṁ to milyo ratana anamola

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1हमें तो मिल्यो रतन अनमोल।

2कोटि कुबेर सिहात मोहिं लखि, पियत प्रेम रस घोल।

3पायो रतन अमोलक मैंने, राधे-राधे बोल।

4रसिकन दीन बताय कृपा करि, बैकुण्ठहुँ की पोल।

5कर्मधर्म सब ढोल पोल है, देख्यों सबइ टटोल।

6साधन सिद्धि “कृपालु” प्रेम दोउ, सुन लो कानहिं खोल॥

हिन्दी भावार्थ

मुझे तो अनमोल रत्न मिल गया है। मुझे सदा प्रेम रस की सुधा पीते देखकर करोड़ों कुबेर सिहाते रहते हैं। इस अमूल्य ने ऐश्वर्ययुक्त बैकुण्ठ की पोल पट्टी भी बता दी है कि यहाँ माधुर्य नहीं हैं। कर्म धर्म सभी का फल क्षणभंगुर है, मैंने सब टटोल कर देख लिया है। 'कृपालु' कहते हैं कि कान खोलकर सब लोग सुन लो कि प्रेम, साधना एवं सिद्धि दोनों ही है।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 168