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RADHEY RADHEY

सिद्धान्त-माधुरी · पद 71

मन! इक दिन ऐसा आयेगा।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: mana! ika dina aisā āyegā

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1मन! इक दिन ऐसा आयेगा।

2जो मुट्ठी बाँधे आया सो, हाथ पसारे जायगा।

3जोरि जोरि भल धरहु करोरन, अंत कफन सँग पायगा।

4जिन को कहत सपूत तिनहिं सों, अंत बाँस सिर खायगा।

5जब यम कालदंड लै अइहैं, देखि देखि डर पायगा।

6तब “कृपालु” धरि हाथ माथ पर, मन ही मन पछतायगा॥

हिन्दी भावार्थ

अरे मन! एक दिन ऐसा आयेगा जिस दिन, जन्म के समय में जो मुट्ठी बाँधकर आया है वह हाथ पसार कर जायेगा। कोई भले ही जोड़-जोड़कर करोड़ों का धन इकट्ठा कर ले, किन्तु अन्त समय में चार गज कफन ही पायेगा। जिनको तू सुपूत कहता है अन्त में उन्हीं के हाथ से सिर पर बाँस की मार खायेगा। जब यमराज काल-दण्ड लेकर आयेगा तब हे मन! तू देख-देखकर डरेगा। 'कृपालु' कहते हैं कि उस समय सिर पर हाथ रखकर तू मन ही मन पछतायेगा किन्तु तब कुछ भी काम न बनेगा। अतएव तू श्यामसुन्दर का भजन कर।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 116