रसिया-माधुरी

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रेम रस मदिरा की 21 माधुरियों में रसिया-माधुरी क्रमांक 20 पर है। इसमें 22 पद हैं। मूल पद और उपलब्ध पुस्तक-स्रोत हिन्दी भावार्थ पढ़ें।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की मूल प्रकाशित रचना। साथ में उपलब्ध गुटका में राधा गोविन्द समिति द्वारा प्रकाशित आठवें संस्करण की तिथि 15 जुलाई 2011 दी गई है। प्रकाशन का इतिहास और स्रोत प्रमाण · आधिकारिक पुस्तक सूची। यहाँ मूल पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोतों से लिप्यंतरित हैं; नए पद या भावार्थ नहीं रचे गए हैं।
- पद 1 · अटको दृग, लखि नटखट पट को।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 2 · आजु निकुंज-मंजु बिच पिउ को, प्यारी निज कर करति सिंगार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 3 · आयो ब्रज, रस बेचन-वारो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 4 · ऐसो प्रेम बढ्यो ब्रजवासिन, जामें ब्रह्म रह्यो भरमाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 5 · छवि निधि रस निधि प्रेम-सुधा-निधि, राधे श्रीवृषभानु दुलार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 6 · जारे जारे, जार जा, हरजाई।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 7 · देखो देखो री, ग्वाल-बालन यारी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 8 · धनि-धनि तिन ब्रज-गोप-वधूटिन,मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 9 · धन-धन रसिकन-धन गोवर्धन, जाने ब्रह्म लियो बिरमाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 10 · धन-धन रसिकन-धन वृन्दावन, जाकी महिमा वरनि न जाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 11 · बलिहारी है तिहारी बनवारी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 12 · ब्रजरस बरसि रह्यो ब्रज बीथिन, ज्ञानी बिनु जाने भरमाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 13 · मोरी तोरी लर, ओरी गोरी! नँद को री।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 14 · या ब्रज की, रीति निराली है।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 15 · रसिकन की, गति रसिकन जाने।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 16 · लखि रस-बरसानो बरसानो, कोटिन ब्रह्मानंद लजाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 17 · वारी-वारी छवि छैल-बिहारी की।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 18 · वारी-वारी छवि, मोर-मुकुट-वारी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 19 · वारी-वारी छवि, वारी नथवारी की।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 20 · वारी-वारी जाऊँ वारी बनवारी पै।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 21 · वृन्दावन, रसिकन रजधानी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 22 · सरस-सुरति-रस सरस सो रति रस, बरसत वृन्दा विपिन मझार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें