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RADHEY RADHEY

प्रेम-माधुरी

स्वर्णिम जलधारा में दो बड़े गुलाबी कमल और पुष्पवृक्ष के नीचे बैठे राधा-कृष्ण, रंगीन काँच जैसी चमक में
एआई से निर्मित चित्र

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रेम रस मदिरा की 21 माधुरियों में प्रेम-माधुरी क्रमांक 6 पर है। इसमें 7 पद हैं। मूल पद और उपलब्ध पुस्तक-स्रोत हिन्दी भावार्थ पढ़ें।

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की मूल प्रकाशित रचना। साथ में उपलब्ध गुटका में राधा गोविन्द समिति द्वारा प्रकाशित आठवें संस्करण की तिथि 15 जुलाई 2011 दी गई है। प्रकाशन का इतिहास और स्रोत प्रमाण · आधिकारिक पुस्तक सूची। यहाँ मूल पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोतों से लिप्यंतरित हैं; नए पद या भावार्थ नहीं रचे गए हैं।

  1. पद 1 · धन्य प्रेम गोपीजन त्रिभुवन,मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  2. पद 2 · प्रीति की अति अटपट गति हाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  3. पद 3 · प्रीति की, अति अड़बंगी रीत।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  4. पद 4 · प्रीति की रीति न जाने कोय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  5. पद 5 · प्रीति सखि नागिनि सी बल खाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  6. पद 6 · प्रेम बिनु ज्ञानी निपट गंमार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  7. पद 7 · बलि जाउँ प्रेम-रस-सार की।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें