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RADHEY RADHEY

मुरली-माधुरी

चाँदनी में बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण से निकलती कल्पित स्वर्णिम ध्वनि-लहरें; वन में सुनते हिरण, मोर और पक्षी
एआई से निर्मित चित्र

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रेम रस मदिरा की 21 माधुरियों में मुरली-माधुरी क्रमांक 17 पर है। इसमें 9 पद हैं। मूल पद और उपलब्ध पुस्तक-स्रोत हिन्दी भावार्थ पढ़ें।

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की मूल प्रकाशित रचना। साथ में उपलब्ध गुटका में राधा गोविन्द समिति द्वारा प्रकाशित आठवें संस्करण की तिथि 15 जुलाई 2011 दी गई है। प्रकाशन का इतिहास और स्रोत प्रमाण · आधिकारिक पुस्तक सूची। यहाँ मूल पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोतों से लिप्यंतरित हैं; नए पद या भावार्थ नहीं रचे गए हैं।

  1. पद 1 · अलि! मुरली के बड़ भाग रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  2. पद 2 · अली मोरी, मुरली कौन लई?।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  3. पद 3 · अली! यह मुरली बुरी बलाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  4. पद 4 · अली! यह, मुरली बैर परी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  5. पद 5 · अरी सखि! क्यों मो पै रिसियाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  6. पद 6 · बँसुरिया, सखि! या लेहु छिनाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  7. पद 7 · मधुर-धुनि, मुरली बजावत कान्ह।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  8. पद 8 · रवति कहुँ, मुरली कुंज कुटीर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  9. पद 9 · श्याम तोरी, मुरली ने जुलुम करी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें