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RADHEY RADHEY

दैन्य-माधुरी

वर्षा और उषा के प्रकाश में कमल के पास घुटनों पर बैठी भक्त; बादलों में करुणा से हाथ बढ़ाते श्रीकृष्ण की कल्पित छवि
एआई से निर्मित चित्र

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रेम रस मदिरा की 21 माधुरियों में दैन्य-माधुरी क्रमांक 4 पर है। इसमें 105 पद हैं। मूल पद और उपलब्ध पुस्तक-स्रोत हिन्दी भावार्थ पढ़ें।

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की मूल प्रकाशित रचना। साथ में उपलब्ध गुटका में राधा गोविन्द समिति द्वारा प्रकाशित आठवें संस्करण की तिथि 15 जुलाई 2011 दी गई है। प्रकाशन का इतिहास और स्रोत प्रमाण · आधिकारिक पुस्तक सूची। यहाँ मूल पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोतों से लिप्यंतरित हैं; नए पद या भावार्थ नहीं रचे गए हैं।

  1. पद 1 · अगति के गति तुम दीनदयाल!मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  2. पद 2 · अपनी ओर टुक हेरो री, किशोरी राधे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  3. पद 3 · अशरण-शरण शरण तव आयो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  4. पद 4 · अहो पिय! जब तुम्हरी बनि जैहौं।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  5. पद 5 · अहो हरि! अब तो सह्यो न जाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  6. पद 6 · अहो हरि! अब हौं गयों अघाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  7. पद 7 · अहो हरि! ओहू दिन कब ऐहैं।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  8. पद 8 · अहो हरि! कब ते द्वार खड़ो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  9. पद 9 · अहो हरि! कब लौं रहिहौं दूरि।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  10. पद 10 · अहो हरि! कहौं कौन पै जाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  11. पद 11 · अहो हरि! तुम मम साहूकार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  12. पद 12 · अहो हरि! देहु मोहिं विरहाग।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  13. पद 13 · अहो हरि! बेर भई रिरियात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  14. पद 14 · अहो हरि! सोचहु पाछिल बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  15. पद 15 · अहो हरि! हरो विषम भव भीर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  16. पद 16 · अहो हरि! हौं पातक अवतार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  17. पद 17 · आजु हरि दैहौं जो तोहिं भाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  18. पद 18 · आजु हौं करिहौं हरि! झगड़ो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  19. पद 19 · कबहुँ सखि हमहुँ देखिहौं श्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  20. पद 20 · कबै हरि बनिहौं ब्रज को मोर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  21. पद 21 · करिय पिय मोहिं भँवरा ब्रज माहिं।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  22. पद 22 · करिय मोहिं कुंज कदंबनि डार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  23. पद 23 · कहत प्रभु! छोटे मुहँ बड़ि बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  24. पद 24 · कहाँ लौं कहिये हरि उपकार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  25. पद 25 · कहाँ हरि! गई कृपा की बानि।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  26. पद 26 · कहाँ हरि! सोये हमरिहिं बार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  27. पद 27 · कहो हरि! हम तुम ते कछु थोर?।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  28. पद 28 · कहो हरि! कहाँ रह्यो तव न्याय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  29. पद 29 · कहौं का, तुम सों नंदकुमार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  30. पद 30 · कहौं हरि कहा? कौन मुहँ लाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  31. पद 31 · कान्ह! टुक सुन लो करि के कान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  32. पद 32 · कान्ह! तुम नहिं मो कहँ पहिचान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  33. पद 33 · किशोरी मोरी, अब न लगाओ बार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  34. पद 34 · किशोरी मोरी, करहु कृपा की कोर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  35. पद 35 · किशोरी मोरी, बिगरी देहु बनाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  36. पद 36 · किशोरी मोरी, सुनिय नेकु इक बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  37. पद 37 · कुँवरि! हौं, मानत हौं निज दोस।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  38. पद 38 · कौन हरि! हमरो तुम्हरो नात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  39. पद 39 · जानि लइ हरि तुम्हरी सब पोल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  40. पद 40 · तुमहिं मम गति गिरिधर गोपाल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  41. पद 41 · दयामय! अपनी ओर निहारो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  42. पद 42 · दयामय! अपनो विरद विचार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  43. पद 43 · दयामय! अब तो दया करो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  44. पद 44 · दयामय! दया चहौं नहिं न्याय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  45. पद 45 · दयामय! मोहिं समान मोहिं जान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  46. पद 46 · दरस कब दैहौ नंदकिशोर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  47. पद 47 · दर्शन देना नंद दुलारे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  48. पद 48 · दीन की सुन लो दीनानाथ।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  49. पद 49 · दीन के तुम ही दीनानाथ।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  50. पद 50 · दीनानाथ मोहिं काहे बिसारे,मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  51. पद 51 · द्वार पतित इक आयो री किशोरी राधे!मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  52. पद 52 · नाथ! अब बूड़त लेहु बचाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  53. पद 53 · नाथ! अब भटकत थकि गये पाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  54. पद 54 · नाथ! अब लाज तिहारी जात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  55. पद 55 · नाथ! जनि अब मो कहँ बहकाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  56. पद 56 · नाथ! मोहिं कीजै दासन दास।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  57. पद 57 · नाथ! यह कौन तिहारो न्याय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  58. पद 58 · नाथ! यह माया कौन बलाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  59. पद 59 · नाथ! हौं गयो सबै विधि हार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  60. पद 60 · नाथ! हौं तुमहिं सोचि पछितात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  61. पद 61 · नाम बड़ दर्शन छोटे श्याम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  62. पद 62 · न्याय अब तुम ही करो ब्रजराज!मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  63. पद 63 · पतित इक देत चुनौती आय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  64. पद 64 · पिया! मोहिं कब ह्वै हौ दुखदाई?।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  65. पद 65 · पिया! मोहिं प्रेम-दान जनि दीजै।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  66. पद 66 · पीर हरि! तुम बिनु कौन हरे?।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  67. पद 67 · प्रभु जी! भले बुरे हम तेरे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  68. पद 68 · बताओ राधे! जाऊँ काके द्वार?।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  69. पद 69 · बनत तुम जानि जानि अनजान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  70. पद 70 · बनहुँ कब प्रेम सरोवर मीन।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  71. पद 71 · बात इक सुनो कान्ह! दै कान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  72. पद 72 · बार इक हेरहु हमरिहिं ओर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  73. पद 73 · बार कत करति हमारिहिं बार!मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  74. पद 74 · बेर भइ टेरत नंदकुमार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  75. पद 75 · भयो को मो सम पतित बड़ो?।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  76. पद 76 · मनमोहन सों मन लाग रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  77. पद 77 · मोहिं तो भरोसो है तिहारो री किशोरी राधे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  78. पद 78 · मोहिं स्वामिनि! अब अपनाइये।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  79. पद 79 · राधे मोहिं, चरण कमल रज कीजै।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  80. पद 80 · लली करु महल टहलिनी मोय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  81. पद 81 · लाल! तुम वृथहिं बजावत गाल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  82. पद 82 · लो स्वामिनी मोहिं अपनाय रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  83. पद 83 · श्याम तुम कैसे दीन दयाल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  84. पद 84 · श्याम तुम कैसे हो घनश्याम?।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  85. पद 85 · श्याम मोहिं देहु प्रेम निष्काम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  86. पद 86 · श्याम है झूठो तुम्हरो नाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  87. पद 87 · श्याम हौं कब ब्रज बसिहौं जाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  88. पद 88 · श्याम हौं कब ह्वैहौँ ब्रजधूरि।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  89. पद 89 · सुनु वंशीवारे साँवरे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  90. पद 90 · सुनो हरि अधम उधारन हार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  91. पद 91 · सुनो हरि दीनन के रखवार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  92. पद 92 · हमरी ओर टुक हेरो री किशोरी राधे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  93. पद 93 · हमारी निधि, श्री वृषभानु दुलार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  94. पद 94 · हमारी राधे, अति भोरी सरकार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  95. पद 95 · हमारी राधे, दीनन की रखवार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  96. पद 96 · हमारी सुधि लीजो भानुदुलार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  97. पद 97 · हमारी, सुन लो नंदकिशोर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  98. पद 98 · हमारी, सुन लो नंदकुमार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  99. पद 99 · हमारी स्वामिनि राधे रानी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  100. पद 100 · हमारो ऐसो नंदकुमार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  101. पद 101 · हमारो धन, राधे जू को नाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  102. पद 102 · हमें तो, एक तिहारी आस।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  103. पद 103 · हमें तो श्याम नाम सों काम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  104. पद 104 · हरि कहँ लौं मन समझाउँ रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
  105. पद 105 · हौं कहँ लौं हरि रिरियाउँ रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें