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RADHEY RADHEY

दैन्य-माधुरी · पद 22

करिय मोहिं कुंज कदंबनि डार।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: kariya mohiṁ kuñja kadambani ḍāra

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1करिय मोहिं कुंज कदंबनि डार।

2जिनमें झूला डारि युगलवर, झूलैं कुंज मझार।

3कबहुँक झोंटा देंय लाल जू, कबहुँ देंय ब्रजनार।

4झूलूँ लाल लली सँग हौं हूँ, झुकि झुकि झूमि निहार।

5प्यारी प्रीतम पर ऊपर ते, करौं पुष्प बौछार।

6लखत “कृपालु” युगल झांकी नित, ह्वै जाऊँ बलिहार॥

हिन्दी भावार्थ

हे श्यामसुन्दर! मुझे कुंज में कदम्ब की वह डाल बना दो, जिसमें श्यामा-श्याम झूला डाल कर झूला करें। किशोरी जी को झुलाने के लिए कभी लाल जी झोंटा दें एवं कभी दोनों को झुलाने के लिए सखियाँ झोंटा दें। मैं भी श्यामा श्याम के साथ ही झुक-झुक कर, झूम-झूम कर उनको देखते हुए झूलूँ एवं ऊपर से युगल सरकार के ऊपर कदम्ब के फूलों की वर्षा करूँ। 'कृपालु' कहते हैं कि इस प्रकार युगल सरकार की मनोहर झाँकी देखते हुए मैं सदा बलिहार जाऊँ।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 191