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RADHEY RADHEY

दैन्य-माधुरी · पद 77

मोहिं तो भरोसो है तिहारो री किशोरी राधे।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: mohiṁ to bharoso hai tihāro rī kishorī rādhe!

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1मोहिं तो भरोसो है तिहारो री किशोरी राधे।

2हौं जस अधम तुमहिं इक जानति,

3और न जाननिहारो री किशोरी राधे।

4भुक्ति मुक्ति नहिं माँगत केवल,

5अपनो जानि निहारो री किशोरी राधे।

6भयो तिहारो जानि राधिके!

7ह्वै जैहौं मतवारो री किशोरी राधे।

8पुनि कहँ रह अवकाश विषय को,

9चारि पदारथ खारो री किशोरी राधे।

10तुम “कृपालु” सरकार हमारी,

11प्यार करो या मारो री किशोरी राधे॥

हिन्दी भावार्थ

हे रासेश्वरी राधे! मुझे तो एकमात्र तुम्हारा ही अवलम्ब है। मैं जिस कोटि का पतित हूँ, उसे तुम्हारे सिवा और कोई भी सांसारिक जीव नहीं जानता। संसार के सुखों से लेकर मोक्ष पर्यन्त का कोई भी सुख मैं नहीं माँगता। केवल यह माँगता हूँ कि तुम मुझे अपना समझकर अपनी कृपामयी दृष्टि से मेरी ओर देखो। जब मैं यह समझ लूँगा कि तुमने मुझे अपना बना लिया है, तब मैं आनन्द में विभोर होकर उन्मत्त हो जाऊँगा। जिसके परिणामस्वरूप सांसारिक विषय-वासनाएँ अपने-आप सदा के लिए समाप्त हो जायेंगी, एवं धर्म, अर्थ काम, मोक्ष ये चारों पदार्थ भी खारे लगने लगेंगे। कृपालु कहते हैं कि हे किशोरी जी! तुम हमारी स्वामिनी हो और सदा रहोगी, चाहे मुझे अपना समझकर प्यार करो चाहे पैरों से कुचलो।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 235-236