मिलन-माधुरी

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रेम रस मदिरा की 21 माधुरियों में मिलन-माधुरी क्रमांक 15 पर है। इसमें 70 पद हैं। मूल पद और उपलब्ध पुस्तक-स्रोत हिन्दी भावार्थ पढ़ें।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की मूल प्रकाशित रचना। साथ में उपलब्ध गुटका में राधा गोविन्द समिति द्वारा प्रकाशित आठवें संस्करण की तिथि 15 जुलाई 2011 दी गई है। प्रकाशन का इतिहास और स्रोत प्रमाण · आधिकारिक पुस्तक सूची। यहाँ मूल पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोतों से लिप्यंतरित हैं; नए पद या भावार्थ नहीं रचे गए हैं।
- पद 1 · अरी सखि!, किरिकिरि आँखि परी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 2 · आज सखि, गिरी शीश पै गाज।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 3 · आजु सखि! ह्वै गये नैना चार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 4 · इकली जनि जइयो कहुँ गोरी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 5 · कछू सखि, कै गयो मो पै आज।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 6 · करन गइ! कालि यमुन असनान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 7 · कहहु सखि, प्रथम-मिलन की बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 8 · कहूँ का, वा दिन की सखि! बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 9 · कहहु सखि! वा दिन की कछु बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 10 · कहूँ मैं, कासों मन की बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 11 · काँकरि मोरि मारी गागरी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 12 · कान्ह कछु कै गयो टोना री।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 13 · कामरी वारे पै, का मरी जात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 14 · कालि की, बात कहौं आली।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 15 · कोउ जनि, जाहु जमुन असनान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 16 · कोउ बेगि बुझाओ, हौं जरी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 17 · गई डसि नागिनि अबहीं भोर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 18 · गई मैं, गिरिधर पर बलिहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 19 · गई लखि, मधुर-मिलन बलिहार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 20 · गई हिय, तीछी बीछी मार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 21 · गयो हरि, मो पै जादू डार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 22 · गागरि मोरि मारी काँकरी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 23 · चलीं दधि, बेचन ब्रज की बाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 24 · छुवो जनि, मनमोहन तन मोर।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 25 · तुम जीवन-जीवन जीवनधन।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 26 · दई अब, हारि गई सब दाउँ।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 27 · दई! हौ, आजु ठगाय गई।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 28 · दई! हौं, गई धार-हूँ धार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 29 · दई! हौ, लुटि गई बीच बजार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 30 · परी मैं, काल लाल के जाल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 31 · बनत नहिं, भनत अनत यह बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 32 · बसे रे मेरे, नैनन पिय! तेरे नैन।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 33 · व्याध इक, मारेहु हिरणिहिं बान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 34 · भई री मैं तो, घायल नैनन बान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 35 · भटू! मैं, पटू लटू भइ आज।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 36 · मनमोहन-छवि मन भा गई।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 37 · मन मोहि लियो मनमोहना।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 38 · मो पै कछु कै गयो नंदकुमार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 39 · मोहिं मोहि लियो निरमोहिया।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 40 · मोहि लइ, मोहिं मोहन-मुसकान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 41 · मोहि लियो, मो मन मदन गोपाल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 42 · यमुन तट, गई भरन घट आज।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 43 · यह कैसी लागि बलाय रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 44 · यह यारी है, हाय या बटमारी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 45 · लखि आजु गई बलिहार रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 46 · लखी इन, नैनन नैनन कान्ह।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 47 · लखी इन, नैनन मृदु-मुसकान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 48 · लखी मैं सखि! सुंदर श्याम सुजान।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 49 · लूटि मोहिं लै गयो नंदकुमार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 50 · सखी! पिय-मुसकनि मन भा-गई।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 51 · सखी! हरि,"छू-मंतर"सों करि गयो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 52 · सखी! इक, सपनो देख्योँ रात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 53 · सखी! क्यों, निज पिय पै इतराय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 54 · सखी! तू, काहे मोहिं छुपाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 55 · सखी! मैं, गिरिधर हाथ बिकानी।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 56 · सखी! मैं, बिकी आजु बिनु दाम।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 57 · सखी! मैं, लुटि गइ कुंज मझार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 58 · सखी! मैं, ह्वै गइ काउ कि आज।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 59 · सखी! मोहिं, डसि गयो श्याम-भुजंग।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 60 · सखी! मोहिं, नैनन-सैन सिखाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 61 · सखी! सुनु, एक दिना की बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 62 · सखी! सुनु, प्रथम मिलन की बात।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 63 · सखी! सुनु, वो मेरे मन भाय।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 64 · साँवरो, जादूगर सरदार।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 65 · सो, टोना सों कछु कै गयो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 66 · हम देखे ढोटा नंद के।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 67 · हरि कै गयो बंटाढार रे।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 68 · हर्यो सखि, मो मन मोहन-लाल।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 69 · हाय दइ! उठत करेजे हूक।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें
- पद 70 · हाय सखी! दृगन मिलाय मन लै गयो।मूल पद और हिन्दी भावार्थइंटरैक्टिव पुस्तक में खोलें