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RADHEY RADHEY

मिलन-माधुरी · पद 66

हम देखे ढोटा नंद के।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: hama dekhe ḍhoṭā nanda ke

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1हम देखे ढोटा नंद के।

2हौं सखि! हैं अवतार सुन्यो अस, ब्रह्म सच्चिदानंद के।

3भई लटू मैं भटू पटू ह्वै, लखतहिं आनँदकंद के।

4सो सुख जान नैन जो पाये, मुसकाने मृदु-मंद के।

5सो सुख जानत श्रवण सुन्यो जो, वेनु-बैन ब्रजचंद के।

6तुम “कृपालु” बचि रहियो उनते, वे स्वामी छल-छंद के॥

हिन्दी भावार्थ

एक सखी अपनी अन्तरंग सखि से कहती है कि अरी सखि! मैंने नन्दकुमार को देखा है। मैंने यह भी सुना है कि वे सच्चिदानन्द ब्रह्म के अवतार हैं। आनन्दकन्द श्यामसुन्दर के देखते ही मैं परम चतुर होकर भी लट्टू हो गयी। अरी सखि उनके मन्द-मन्द मुस्कराने से जो सुख मिला उसे केवल नेत्र ही जानते हैं एवं उनकी मधुर मुरली की तान से जो सुख मिला उसे भी केवल कान ही जानते हैं। 'कृपालु'अपने लिए कहते हैं कि वे छलियों के शिरोमणि हैं अतएव तुम उनसे बचे रहना अन्यथ तुम्हारी भी बुरी दशा होगी।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 615