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RADHEY RADHEY

मिलन-माधुरी · पद 6

करन गइ! कालि यमुन असनान।

पुस्तक का रोमन लिप्यन्तरण: karana gai, kāli yamuna asanāna

मूल पद के लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

मूल पद

1करन गइ! कालि यमुन असनान।

2न्हात हि न्हात अचानक आयो, सुंदर श्याम सुजान।

3बिनु बैनन नैनन सैनन दिय, मारि बान मोहिं तान।

4भई विवस रस बस जब, बरबस, तन परसन मन ठान।

5कटि लौं जलहिं कह्योँ हौं बूड़ी, कोउ बचावहु प्रान।

6धाय “कृपालु” उठाय लियो हरि, सो सुख कौन बखान॥

हिन्दी भावार्थ

एक सखी कहती है कि मैं कल यमुना नहाने गर्य थी, नहाते समय ही अचानक श्यामसुन्दर आ गये एवं बिन कुछ बोले ही आँखों के कटाक्ष से तानकर मुझे बाण सा मा दिया, अब मैं बरबस प्रेमरस विभोर हो गयी तब मन श्यामसुन्दर के सुन्दर शरीर के स्पर्श की उत्कट कामना ठा ली। अतएव कमर भर पानी में ही अभिनय करते हुए ' डूबी, कोई मेरे प्राण बचाओ'ऐसा चिल्लाने लगी। 'कृपालु' कहते हैं कि इतने में ही श्यामसुन्दर ने दौड़कर मुझे उत लिया। अरी सखी! श्यामसुन्दर के उस मधुर स्पर्श का आनन अनिर्वचनीय था।

प्रकाशित पुस्तक से लिप्यंतरित पूरे पद का भावार्थ। स्रोत में पंक्ति-दर-पंक्ति या शब्द-दर-शब्द अर्थ नहीं दिया गया है।

भावार्थ स्रोत पृष्ठ: 567