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ब्रज रस माधुरी

PART I · Prayers and aartis · 12/240

प्रार्थना एवं आरती

प्रार्थना · Prayer

46 source linesपुस्तक पृष्ठ 8–10PDF 29–31

मत्प्रेयान् राधिकाप्रेयान्

मत्प्रेयान् राधिकाप्रेयान् मद्धवो राधिकाधवः।

तस्मादपि गरीयान्यो कृपालुर्मे जगद्गुरुः।।

गुरुं भजति श्रीकृष्णः श्रीकृष्णं भजते गुरुः।

सिद्धान्ततस्त्वभेदेऽपि कृपालुर्मे गुरुर्महान्।।

यस्य साक्षात् भगवति ज्ञानदीपप्रदे गुरौ।

मर्त्यासद्धीः श्रुतं तस्य सर्वं कुंजरशौचवत्।।

एष वै भगवान् साक्षात् प्रधान पुरुषेश्वरः।

योगेश्वरैर्विमृग्यांघ्रिर्लोकोऽयं मन्यते नरम्।।

यमुना निकट तटस्थित वृन्दावन कानने महारम्ये।

कल्पद्रुमतलभूमौ चरणं चरणोपरिस्थाप्य।।

तिष्ठंतं घननीलं स्वतेजसा भासयन्तमिह विश्वम्।

पीताम्बरपरिधानं चन्दनकर्पूरलिप्तसर्वांगम्।।

आकर्णपूर्णनेत्रं कुण्डलयुगमंडितश्रवणम्।

मंदस्मितमुखकमलं सकौस्तुभोदारमणिहारम्।।

Source page 9

वलयांगुलीयकाद्यानुज्ज्वलयन्तं स्वलंकारान्।

गलविलुलितवनमालं स्वतेजसापास्तकलिकालम्।।

गुंजारवालिकलितं गुंजापुंजान्विते शिरसि।

भुंजानं सह गोपैः कुंजांतर्वर्तिनं नमत।।

मन्दारपुष्पवासितमंदानिल सेवित परानन्दम्।

मन्दाकिनीयुतपदं नमत महानन्ददं महापुरु षम्।।

सुरभीकृतदिग्वलयं सुरभिशतैरावृतः परितः।

सुरभीतिक्षपणमहासुरभीमं यादवं नमत।।

अशरण-शरण महाप्रभो, तुम स्वामी हम दास।

कीजै कृपा कृपालु मम, दीजै गुरु सहवास।।

तुम दीनन रखवार हम, अहंकार अवतार।

अस करु कृपा “कृपालु” अब,दीन बनूँ सरकार।।

हौं ऐसो हौं पतित जो, पतित न आपुहिँ मान।

ऐसे पतित विचित्र को, पावन करु तब जान।।

सबै भिखारी जगत के, जेतिक नातेदार।

दिव्य प्रेम आनन्द के, तुम इक साहूकार।।

Source page 10

धनि गुरुवर धाम निवास सुनो मन,

पुण्यन पुंज सों पाइये जू।

बनि दीन प्रपन्न रहो गुरु के,

नित सेवा सों ताहि रिझाइये जू।

मन ते हरि को गुरु को सुमिरो,

रसना सों सदा गुन गाइये जू।

क्षणभंगुर जीवन जानि मना,

छनहूँ जनि व्यर्थ गँवाइये जू।

सब धामन वारो वृन्दावन पै,

औ वृन्दावन हूँ गुरुधाम पै वारो।

जो गुरु के पद प्रीति जुरी तो,

भज्यो चलि आवेगो ब्रह्म बिचारो।

है हरि निर्मल भक्त न को,

गुरु है अधमों को उधारन हारो।

औरन को गुरु हो या न हो,

गुरु मेरो “कृपालु” सुभाग हमारो॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १012
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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