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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 155 · 179/240

कीर्तन 151–200

कीर्तन 155 · Kirtan 155

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 252PDF 273

राघवेन्द्र रघुपति श्री राम,

(भजु मन मेरे...)

राघवेन्द्र रघुपति श्री राम,

शोभित सीता माता बाम।

नयनाभिराम राम पूर्णकाम,

चिदघन आनँदघन तन श्याम।

प्रेम रूप रस अम्बुधि राम,

राम समान दयानिधि राम।

भुक्ति मुक्ति नहिं माँगत राम,

दे दो मोहिं प्रेम निष्काम।

नहिं चहिये बैकुण्ठ ललाम,

हमें एक रामहिं सो काम।

यदपि राम हैं पूर्णकाम,

बिके भक्त कर बिनुहिं दाम।

तुम मेरे हम तेरे राम,

पुनि मोहिं बिसरायेउ कस राम।

नहिं कृपालु कोउ अस जस राम,

गीधहुँ दीन्यों आपुनो धाम।।

ब्रज रस माधुरी · भाग १179
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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