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भजु मन मेरे आठों याम,
जय राम जय राम जय जय राम।
नृप दशरथ नंदन श्री राम।
जनकनंदिनी सीता बाम।
इंद्रनीलमणि तनु दुति राम।
Source page 250
लजवत कोटि काम छवि राम।
सुख को दे सुख अस मम राम।
सतघन चितघन सुखघन राम।
शक्ति ह्लादिनी सीता बाम।
पूर्ण ब्रह्म पुरु षोत्तम राम।
आनंदहुँ आनँद दे राम।
जीवन को जीवन दे राम।
गीधहुँ हृदय लगावत राम।
दीनन को अपनावत राम।
बिनु कारण करुणाकर राम।
सबके सहज सनेही राम।
सबके ही उरपुर बस राम।
सब ईश्वर के ईश्वर राम।
राम समान एक बस राम।
राम नाम बड़ छोटो राम।
चुवत रोम प्रति रस तनु राम।
सकल विश्व स्रष्टा हैं राम।
सकल विश्व पालक हैं राम।
सकल विश्व संहारक राम।
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अधम उधारन हैं श्री राम।
शरणागत रक्षक हैं राम।
पतितन हृदय लगावत राम।
तुम अकिंचन के हो राम।
अशरण शरण एक तुम राम।
निर्बल के बल तुम ही राम।
निरवलंब अवलंबन राम।
तुम स्वारथ परमारथ राम।
प्रेम अकाम देहु मोहिं राम।
श्याम रूप धरि आवहु राम।
तुमहिं श्याम हो तुम ही राम।
तुम ही मम मैं भी तव राम।
विधि हरि हर तव किंकर राम।
तुम्हरी कृपा जान तोहिं राम।
परम “कृपालु” कृपा करु राम।।
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