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मम ठकुरानी अवढरदानी, राधे रानी स्वामिनी।
(ठाकुर युगल किशोर...)
मम ठकुरानी अवढरदानी, राधे रानी स्वामिनी।
छवि अभिरामिनि सँग ब्रजभामिनि, लजवति गतिगजगामिनी।
ब्रह्माणी रुद्राणी वाणी, सेवत बनि अनुरागिनी।
जग मोहन मोहन मन मोहिनि, निज मन मोहिनि भामिनी।
भोरी भोरी गोरी गोरी, तनु दमकति जनु दामिनी।
कह “कृपालु” घन जनुु मनमोहन, स्वामिनि हैं जनु दामिनी।।
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