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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 114 · 138/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 114 · Kirtan 114

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

22 source linesपुस्तक पृष्ठ 207–208PDF 228–229

राधे गोविन्दा गोविन्दा, राधे राधे गोविन्दा।

(मन तेरो साँचो..)

राधे गोविन्दा गोविन्दा, राधे राधे गोविन्दा।

सदघन चिदघन आनँदकन्दा, राधे राधे गोविन्दा।

वारौं कोटिन ब्रह्मानन्दा, राधे राधे गोविन्दा।

खारो लग ऐश्वर्यानन्दा, ऐसो माधुर्यानन्दा।

गति नहिं चारिहुँ श्रुति छन्दा, राधे राधे गोविन्दा।

राधे जोइ सोइ गोविन्दा, राधे सोइ जोइ गोविन्दा।

इक हैं सुगन्ध, इक हैं कपूर सम राधे गोविन्दा।

हैं इक क्षीर, श्वेतिमा हैं इक, राधे राधे गोविन्दा।

बन गये दोउ चकोर दोउ चन्दा, राधे राधे गोविन्दा।

जानें दोउन की गति दोउन, राधे राधे गोविन्दा।

राधे गोविन्दा सखि वृन्दा, तीनिहुँ उर धरु मतिमन्दा।

रसिकन धन वृन्दावन-चन्दा, राधे राधे गोविन्दा।

बनि गये शंकर नर ते नारी, ऐसो युगल प्रेम फन्दा।

Source page 208

तेरो स्वामी श्याम स्वामिनी श्यामा, राधे गोविन्दा।

परखत भुज पसारि तोहिं पल छिन, राधे राधे गोविन्दा।

अइहैं भाजत करु टुक क्रन्दन, मम मन राधे गोविन्दा।

लखिहौं कब मानिनिहिं मनावत, राधे राधे गोविन्दा।

राधावर राधा पग चापत, राधे राधे गोविन्दा।

पिय धर मुकुट ललिहिं पग देखहुँ, राधे राधे गोविन्दा।

अइहैं गलबहियाँ दै झूमत कब, दोउ राधे गोविन्दा।

हौं अति हठी “कृपालु” न पाछा छोड़ूँ राधे गोविन्दा॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १138
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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