कीर्तन 101–150
कीर्तन 114 · Kirtan 114
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे गोविन्दा गोविन्दा, राधे राधे गोविन्दा।
राधे गोविन्दा गोविन्दा, राधे राधे गोविन्दा।
सदघन चिदघन आनँदकन्दा, राधे राधे गोविन्दा।
वारौं कोटिन ब्रह्मानन्दा, राधे राधे गोविन्दा।
खारो लग ऐश्वर्यानन्दा, ऐसो माधुर्यानन्दा।
गति नहिं चारिहुँ श्रुति छन्दा, राधे राधे गोविन्दा।
राधे जोइ सोइ गोविन्दा, राधे सोइ जोइ गोविन्दा।
इक हैं सुगन्ध, इक हैं कपूर सम राधे गोविन्दा।
हैं इक क्षीर, श्वेतिमा हैं इक, राधे राधे गोविन्दा।
बन गये दोउ चकोर दोउ चन्दा, राधे राधे गोविन्दा।
जानें दोउन की गति दोउन, राधे राधे गोविन्दा।
राधे गोविन्दा सखि वृन्दा, तीनिहुँ उर धरु मतिमन्दा।
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तेरो स्वामी श्याम स्वामिनी श्यामा, राधे गोविन्दा।
परखत भुज पसारि तोहिं पल छिन, राधे राधे गोविन्दा।
अइहैं भाजत करु टुक क्रन्दन, मम मन राधे गोविन्दा।
लखिहौं कब मानिनिहिं मनावत, राधे राधे गोविन्दा।
राधावर राधा पग चापत, राधे राधे गोविन्दा।
पिय धर मुकुट ललिहिं पग देखहुँ, राधे राधे गोविन्दा।
