कीर्तन 151–200
कीर्तन 187 · Kirtan 187
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्यामा आ गईं हैं संग लेके ब्रज बामा।
श्यामा आ गईं हैं संग लेके ब्रज बामा।
भाजे भाजे अइहैं श्याम मधुपुरि धामा॥
आईं आईं शोर चहुँ ओर ब्रज धामा।
भोरी भारी नथवारी प्यारी प्यारी श्यामा॥
ब्रह्मा, विष्णु, शिव अरु उमा रमा बामा।
ब्रह्मा वेद पाठ करें बरसाने धामा।
भानु ने तपस्या कौन कीन्ही कौन धामा।
जाते बने बाबा शक्ति ह्लादिनी श्यामा॥
लाली को लाड़ लड़ायो आठों यामा॥
Source page 278
धनि वृषभानु भूप धनि कीर्ति बामा।
लाली जू की लीला लखें बड़भागी बामा।
हम भी बड़भागी लीला गुन गावें श्यामा॥
लाली जू की लीला लखें बड़भागी बामा।
हम भी बड़भागी लीला गुन गावें श्यामा॥
भानुघर भारी भीर गोप ब्रज बामा।
सब ब्रजवासी चाहें दर्शन श्यामा॥
कोऊ गावे कोऊ नाचे भानुभूप धामा।
तिल धरने की नाहिं ठौर भानु धामा।
भारी भीर एक स्वर बोले “जय श्यामा”॥
चलो री बधाई गाने सब ब्रज धामा॥
Source page 279
मणि मुक्ता थार लुटावें कीर्ति बामा।
लूटे न कोउ माँगे दर्शन श्यामा॥
मणि मुक्ता नहिं चह कीरति बामा।
कुँवरि को देखे बिनू जाउँ नहीं धामा।।
बधाई गवाई कछु ना दे कीर्ति बामा।
गोद में लै दुलराऊँ तेरी लाली श्यामा॥
कीर्ति मैया आई मैं बधाई गाने धामा।
न्यौछावर माँगूँ प्रेम निष्काम श्यामा॥
युग युग ऋणी रहौं तेरी कीर्ति बामा।
काहु की नजर नहिं लागे ब्रज धामा।
राइ नोन वारूँ तो पै भानुलली श्यामा॥
Source page 280
खाली झोली लै के आई श्यामा तव धामा।
झोली भर दे दे दर्शन भीख श्यामा॥
मेरी ओर लखि मुसका दे नेकु श्यामा॥
कृपा की बुलाया तूने श्यामा निज धामा।
मेरी भी उमर लग जाये तोहिं श्यामा॥
बधाई गवाई दे दे मोको कीर्ति बामा।
दिन रात सेवा करुँ धाइ बनि श्यामा॥
बदले में वस्त्र धोऊँ नहलाउँ श्यामा॥
महल में दासी बना दे कीर्ति बामा।
Source page 281
गावो सब नाम गुन लीला अरु धामा।
यही है बधाई बालो “जय हो जय हो श्यामा”॥
तीनों का ही अभिनन्दन करूँ श्यामा॥
मोहिं लखि जाने काहे मुसकाइ श्यामा॥
फूली न समाई लखि मुसकनि श्यामा।
किन्तु मुसकाई काहे सोचूँ आठु यामा॥
तोरे जन्म दिन पै भेंट का दूँ श्यामा।
मेरा तो मैं भी नहिं तेरा सब श्यामा।
तेरा तुझे दूँ तो हँसें सब ब्रज बामा॥
तू तेरा सब कुछ चिदानंद श्यामा।
“मैं” मेरा भला तेरे आवे कौन कामा॥
Source page 282
भली बुरी जैसी हूँ तेरी हूँ श्यामा।
भेंट में मुझे ही ले बना दे ब्रज बामा॥
तन मन प्राण तेरा दिया हुआ श्यामा।
देना क्या है ले ले दे दे प्रेम निष्कामा।।
सुनते थे शास्त्रों में प्रेम रूप नामा।
सोइ प्रेम रूप रूप धरि आईं श्यामा॥
मोहिं निज धाम में बनाना ब्रज बामा॥
ब्रज धाम में भी मिले बरसाना धामा।
बरसाना में भी मिले धाई पद श्यामा।।
श्यामा जू की देह दुति चिदानन्दधामा।
अन्धकार में भी प्रकाश करें श्यामा॥
चम्पक बरनि जैसी गौर तनु श्यामा।
नीली नीली चमकीली झँगुली ललामा॥
Source page 283
देखुँ तोहिं कैसे तू तो चिदानन्द श्यामा॥
वेद कहें हम नाहिं जाने कौन श्यामा।
बामा कहें चलो दिखला दें भानु धामा॥
ब्रज में प्रकट हुआ ब्रह्म बनि श्यामा।
लाली लाली कहें ब्रजवासी ब्रजधामा॥
लाली की छठी है आज बरसाने धामा।
चलो री बधाई गाने सब ब्रज बामा॥
सुनि के बधाई मुसका देंगी श्यामा।।
नाचो गाओ छठी की बधाई ब्रज बामा।
Source page 284
मायिक शिशु की बधाई गावैं गामा।
तेरा तो तन मन चिदानन्द श्यामा।।
श्यामा जू को दिव्य तनु आनंद धामा।
दिव्य दृष्टि मिले तब देखे कोउ श्यामा॥
भानु को बधाई दें या दें कीर्ति बामा।
या दें बधाई श्यामा को ब्रजधामा॥
प्रथम बधाई की हैं पात्र ब्रज बामा।
जिन्हें ब्रज रस देने आये श्याम श्यामा।।
अभी तो हुई हैं छे दिन की ही श्यामा।
काम, क्रोध, लोभ आदि, शत्रु छे श्यामा।
छठी को छहों को बना दे निष्कामा॥
श्यामा की छठी है चलो बरसाने धामा।
