लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 187 · 211/240

कीर्तन 151–200

कीर्तन 187 · Kirtan 187

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

127 source linesपुस्तक पृष्ठ 277–284PDF 298–305

श्यामा आ गईं हैं संग लेके ब्रज बामा।

(श्यामा श्याम गीत)

श्यामा आ गईं हैं संग लेके ब्रज बामा।

भाजे भाजे अइहैं श्याम मधुपुरि धामा॥

आईं आईं शोर चहुँ ओर ब्रज धामा।

भोरी भारी नथवारी प्यारी प्यारी श्यामा॥

ब्रह्मा, विष्णु, शिव अरु उमा रमा बामा।

हुये सब मोहित लखि छवि श्यामा॥

ब्रह्मा वेद पाठ करें बरसाने धामा।

शिव करें ताण्डव संग गोप बामा॥

भानु ने तपस्या कौन कीन्ही कौन धामा।

जाते बने बाबा शक्ति ह्लादिनी श्यामा॥

कीरति के भाग की न समता बामा।

लाली को लाड़ लड़ायो आठों यामा॥

धन्य भूप भानु धन्य कीर्ति रानी बामा।

चूमें चिपटावें दुलरावें नित श्यामा॥

Source page 278

धनि वृषभानु भूप धनि कीर्ति बामा।

धनि ब्रजवासी धनि बरसानो धामा॥

लाली जू की लीला लखें बड़भागी बामा।

हम भी बड़भागी लीला गुन गावें श्यामा॥

लाली जू की लीला लखें बड़भागी बामा।

हम भी बड़भागी लीला गुन गावें श्यामा॥

भानुघर भारी भीर गोप ब्रज बामा।

सब ब्रजवासी चाहें दर्शन श्यामा॥

कोऊ गावे कोऊ नाचे भानुभूप धामा।

कोउ बजावे ढोल ढप ब्रज बामा॥

तिल धरने की नाहिं ठौर भानु धामा।

भारी भीर एक स्वर बोले “जय श्यामा”॥

गोलोक ते आईं बरसाने श्यामा।

चलो री बधाई गाने सब ब्रज धामा॥

बधाई लो बधाई लो बधाई कीर्ति बामा।

तेरी गोद प्रकट भईं ब्रह्म श्यामा॥

Source page 279

मणि मुक्ता थार लुटावें कीर्ति बामा।

लूटे न कोउ माँगे दर्शन श्यामा॥

मणि मुक्ता नहिं चह कीरति बामा।

कुँवरि को देखे बिनू जाउँ नहीं धामा।।

बधाई गवाई कछु ना दे कीर्ति बामा।

गोद में लै दुलराऊँ तेरी लाली श्यामा॥

कीर्ति मैया आई मैं बधाई गाने धामा।

न्यौछावर माँगूँ प्रेम निष्काम श्यामा॥

युग युग ऋणी रहौं तेरी कीर्ति बामा।

एक झलक दिखला दे लाली श्यामा॥

तेरी लाली अमर रहे ब्रज धामा।

देवें शुभकामना कीरति को बामा॥

काहु की नजर नहिं लागे ब्रज धामा।

राइ नोन वारूँ तो पै भानुलली श्यामा॥

भुक्ति मुक्ति नाहिं चह कीरति बामा।

कुँवरि को देखे बिन जाउँ नहिं धामा॥

Source page 280

खाली झोली लै के आई श्यामा तव धामा।

झोली भर दे दे दर्शन भीख श्यामा॥

दूर ते आई हूँ मैं तेरे धामा।

मेरी ओर लखि मुसका दे नेकु श्यामा॥

कृपा की बुलाया तूने श्यामा निज धामा।

मेरी भी उमर लग जाये तोहिं श्यामा॥

बधाई गवाई दे दे मोको कीर्ति बामा।

दिन रात सेवा करुँ धाइ बनि श्यामा॥

दिन रात गाऊँगी बधाई तव धामा।

बदले में वस्त्र धोऊँ नहलाउँ श्यामा॥

महल में दासी बना दे कीर्ति बामा।

लोरी गाके तोरी सुलाऊँ लली श्यामा॥

बार बार गाओ बधाई न तु श्यामा।

वापस चली जायेंगी निज धामा॥

रस बरसाने आईं बरसाने धामा।

तोरे ऋण उऋण न कोउ कभु श्यामा।।

Source page 281

गावो सब नाम गुन लीला अरु धामा।

यही है बधाई बालो “जय हो जय हो श्यामा”॥

वृषभानु कीरति बरसानो धामा।

तीनों का ही अभिनन्दन करूँ श्यामा॥

दर्शन को गई बरसाने धामा।

मोहिं लखि जाने काहे मुसकाइ श्यामा॥

फूली न समाई लखि मुसकनि श्यामा।

किन्तु मुसकाई काहे सोचूँ आठु यामा॥

तोरे जन्म दिन पै भेंट का दूँ श्यामा।

मायिक मोरा तन मन धन धामा॥

मेरा तो मैं भी नहिं तेरा सब श्यामा।

तेरा तुझे दूँ तो हँसें सब ब्रज बामा॥

तू तेरा सब कुछ चिदानंद श्यामा।

“मैं” मेरा भला तेरे आवे कौन कामा॥

तोहिं भेंट का दूँ श्यामा तू तो पूर्णकामा।

आँसुओं का हार उपहार ले ले श्यामा॥

Source page 282

भली बुरी जैसी हूँ तेरी हूँ श्यामा।

भेंट में मुझे ही ले बना दे ब्रज बामा॥

तन मन प्राण तेरा दिया हुआ श्यामा।

देना क्या है ले ले दे दे प्रेम निष्कामा।।

सुनते थे शास्त्रों में प्रेम रूप नामा।

सोइ प्रेम रूप रूप धरि आईं श्यामा॥

जब जब अवतार होवे ब्रज श्यामा।

मोहिं निज धाम में बनाना ब्रज बामा॥

ब्रज धाम में भी मिले बरसाना धामा।

बरसाना में भी मिले धाई पद श्यामा।।

श्यामा जू की देह दुति चिदानन्दधामा।

अन्धकार में भी प्रकाश करें श्यामा॥

चम्पक बरनि जैसी गौर तनु श्यामा।

नीली नीली चमकीली झँगुली ललामा॥

जब ते प्रकट हुई श्यामा भानु धामा।

महल में चहल पहल रहे आठों यामा॥

Source page 283

आ तो गयीं श्यामा बरसाने धामा।

देखुँ तोहिं कैसे तू तो चिदानन्द श्यामा॥

वेद बताये जगजननी हैं श्यामा।

कीरति को जननी बताये ब्रजधामा॥

वेद कहें हम नाहिं जाने कौन श्यामा।

बामा कहें चलो दिखला दें भानु धामा॥

ब्रज में प्रकट हुआ ब्रह्म बनि श्यामा।

लाली लाली कहें ब्रजवासी ब्रजधामा॥

लाली की छठी है आज बरसाने धामा।

चलो री बधाई गाने सब ब्रज बामा॥

चलो बरसाने बधाई गाने बामा।

सुनि के बधाई मुसका देंगी श्यामा।।

नाचो गाओ छठी की बधाई ब्रज बामा।

सुनि के बधाई मुसकाई कालि श्यामा॥

आओ आओ आओ बधाई गाओ बामा।

रोज रोज आवे न छठी प्यारी श्यामा॥

Source page 284

मायिक शिशु की बधाई गावैं गामा।

तेरा तो तन मन चिदानन्द श्यामा।।

श्यामा जू को दिव्य तनु आनंद धामा।

दिव्य दृष्टि मिले तब देखे कोउ श्यामा॥

भानु को बधाई दें या दें कीर्ति बामा।

या दें बधाई श्यामा को ब्रजधामा॥

प्रथम बधाई की हैं पात्र ब्रज बामा।

जिन्हें ब्रज रस देने आये श्याम श्यामा।।

अभी तो हुई हैं छे दिन की ही श्यामा।

बाबा मैया पहिचानें अचरज बामा॥

काम, क्रोध, लोभ आदि, शत्रु छे श्यामा।

छठी को छहों को बना दे निष्कामा॥

श्यामा की छठी है चलो बरसाने धामा।

गावो बधाई पावो दर्शन श्यामा॥

श्यामा की छठी को गाओ श्यामा की बधाई।

भुक्ति मुक्ति माँगो जनि माँगो सेवकाई॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १211
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text