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ब्रज रस माधुरी

PART I · Practice and instructions · 24/240

साधना एवं निर्देश

मार्गदर्शन · Guidance

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 27–28PDF 48–49

श्री जगद्गुरु मुखारविन्द से

जिस दिन किसी जीव को यह दृढ़ विश्वास हो जायगा कि

भगवान् और भगवान् का नाम एक ही हैं, दोनों में एक सी

शक्ति याँ हैं, एक से गुण हैं, उसी क्षण उसको भगवत्प्राप्ति हो

जायेगी। स्वर्ण अक्षरों में लिख लो। भगवान् की इतनी बड़ी कृपा

है कि वे कहते हैं कि मैं सर्वव्यापक हूँ, तू इसको मानता नहीं है,

मैं गोलोक में रहता हूँ वहाँ तुम आ नहीं सकते, मैं तुम्हारे

अन्तःकरण में तुम्हारे साथ बैठा हूँ इसका तुम्हें ज्ञान नहीं है,

इसलिये लो मैं अपने नाम में अपने आपको बैठा देता हूँ। नाम में

मैं मूर्तिमान बैठा हुआ हूँ, जिस दिन यह बात तुम्हारे मन में बैठ

जायगी, उस दिन फिर एक नाम भी जब लोगे, जब एक बार

राधे कहोगे तो कहा नहीं जायगा, वाणी रु क जायगी, मन डूब

जायगा, कंठ गद्गद हो जायगा। फिर भगवत्प्राप्ति में क्या देर

होगी? गुरु कृपा में क्या देर होगी? केवल इसी वचन पर

विश्वास कर लो।

तुम्हारा

कृपालु

मूल पुस्तक का चरण-चिह्न चित्र · मुद्रित पृष्ठ 28 (PDF पृष्ठ 49)
मूल पुस्तक का चरण-चिह्न चित्र · मुद्रित पृष्ठ 28 (PDF पृष्ठ 49)
ब्रज रस माधुरी · भाग १024
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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