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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 70 · 94/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 70 · Kirtan 70

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 137–138PDF 158–159

मोरी भोरी सी किशोरी, तनु गोरी, रसबोरी,

(ओरे मोरे मन...)

मोरी भोरी सी किशोरी, तनु गोरी, रसबोरी,

चोरी चोरी चित चोरी चितचोरहुँ की।

रसिक रँगीली, गुन गर्वीली,

छैल छबीली श्री राधे।

Source page 138

रूप उजागरि, सब गुन आगरि,

रति रस नागरि श्री राधे।

मोरी सोइ स्वामिनि, जोइ स्वामिनि,

रसिकन के सिरमोरहुँ की।

प्रीतम प्यारी भानुदुलारी,

भोरी भारी श्री राधे।

गति अलबेली, मति अलबेली,

रति अलबेली श्री राधे।

सहि न सकत रस रसिक शिरोमणि,

चितवनि चितवनि-कोरहुँ की।

बेसर वारी सेंदुर वारी,

चूनरि वारी श्री राधे।

गति गज गामिनि, छवि अभिरामिनि,

सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

चलत “कृपालु” न सन्मुख एकहुँ

बरजोरी बरजोरहुँ की।

ब्रज रस माधुरी · भाग १094
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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