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मेरी अलबेली सरकार,
(भजु मन मेरे आठो...)
मेरी अलबेली सरकार,
जाकर चाकर नंदकुमार।
मैं उनकी वे मेरे यार,
नाहिँ चहत वैकुण्ठ विहार।
उन पनिहारिनि की बलिहार,
नचवति थेइ थेइ नंदकुमार।
ब्रज रज महिमा अपरंपार,
याचति मुक्तिहिँ मुक्तिहुँ चार।
मेरी स्वामिनि परम उदार,
नहिं कोउ अस “कृपालु” सरकार॥
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