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आरती श्री कृष्ण (बाल रूप)
आरती श्री कृष्ण
(बाल रूप)
आरति यशुमति शिशु की कीजै।
जय जय जय नँदनंदन की जै॥
सुकृत कौन यशुमति अस तेरो।
जासों ब्रह्म भयो शिशु तेरो।
विधि हरि हरहुँ सेव्य शिशु तेरो,
स्वामि सखा सुत पति सोइ मेरो।
मोहिँ अपनाय कृपा अस कीजै,
जय जय जय नँदनंदन की जै।।
जगतपिता है यह शिशु तेरो,
मैं भी इक जग महँ शिशु तेरो।
भलो बुरो जैसो हूँ तेरो,
कोउ अवलंब और नहिं मेरो।
मोहिँ “कृपालु” अपनो करि लीजै,
जय जय जय नँदनंदन की जै॥
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