लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART I · Prayers and aartis · 17/240

प्रार्थना एवं आरती

आरती · Aarti

16 source linesपुस्तक पृष्ठ 17PDF 38

आरती श्री कृष्ण (बाल रूप)

आरती श्री कृष्ण

(बाल रूप)

आरति यशुमति शिशु की कीजै।

जय जय जय नँदनंदन की जै॥

सुकृत कौन यशुमति अस तेरो।

जासों ब्रह्म भयो शिशु तेरो।

विधि हरि हरहुँ सेव्य शिशु तेरो,

स्वामि सखा सुत पति सोइ मेरो।

मोहिँ अपनाय कृपा अस कीजै,

जय जय जय नँदनंदन की जै।।

जगतपिता है यह शिशु तेरो,

मैं भी इक जग महँ शिशु तेरो।

भलो बुरो जैसो हूँ तेरो,

कोउ अवलंब और नहिं मेरो।

मोहिँ “कृपालु” अपनो करि लीजै,

जय जय जय नँदनंदन की जै॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १017
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text