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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 111 · 135/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 111 · Kirtan 111

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 203PDF 224

मेरी प्राण प्यारी बरसाने वारी प्यारी,

(राधावर पर सरवस हारी)

मेरी प्राण प्यारी बरसाने वारी प्यारी,

जापै सब वारी सोउ बनवारी वारी।

जग मोहन मोहन बनवारी,

उन मोहन मन मोहिनि प्यारी।

ब्रजरस टपकत रोम रोम प्यारी,

पियत निरन्तर रसिक बिहारी।

लखि न सकत पिय अस छवि प्यारी,

रहि न सकत बिनु लखेहुँ मुरारी।

इक वर माँगे पिय दे दो मम प्यारी,

मोते कभू रूठोगी ना अति भोरी भारी।

इक वर माँगे पिय दे दो सुकुमारी,

रूठो तो मनाने ते न रोको मोहिं प्यारी।

मेरी प्यारी प्यारी बरसाने वारी प्यारी,

मेरी भोरी भारी सुकुमारी नथवारी।

मेरी ऐसी प्यारी बरसाने वारी प्यारी,

जापै वारी वारी सो “कृपालु” बनवारी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १135
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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