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राधा प्रेम अगाधा स्वामिनि,
(चिंतय चित्त...)
राधा प्रेम अगाधा स्वामिनि,
ह्लादिनि शक्ति रूपिणी भामिनि।
गौर बरन तनु जनु दुति दामिनि,
हंस लजावनि गति गजगामिनि।
संग करोरन ब्रज की भामिनि,
रास करत तिन सँग नित यामिनि।
Source page 144
छवि लजाति लखि छवि अभिरामिनि,
नहिँ पावत रस कमला कामिनि।
लखति द्वारिका रस ही कामिनि,
युगल विहार लखति निष्कामिनि।
जोइ “कृपालु” जग स्वामिहुँ स्वामिनि,
सोइ मम स्वामिनि राधा नामिनि।
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