Skip to main content

तेरा अंत न पायो कोऊ अनंत।
(नीको लागे मोको...)
तेरा अंत न पायो कोऊ अनंत।
हारे सारे वेद, सारे शास्त्र, सारे संत।
तू भी तो न पायो अंत अपना अनंत।
माने न अनंत हम, माने तोहिं कन्त।
तेरे नाम रूप लीला, गुण हैं अनन्त।
अशरण शरण कहत तोहिं संत।
शरण शरण मैं हूँ, शरण अनंत।
❦
Source, meanings & reading links