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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 26 · 50/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 26 · Kirtan 26

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

28 source linesपुस्तक पृष्ठ 56–57PDF 77–78

मेरे मन में समाय गयो साँवरिया।

वाके सिर सोहे पीरी पागरिया।

जाके कंध लकुटि अरु कामरिया।

जाके कटि किंकिनि पग पायलिया।

राधे राधे गाय गयो साँवरिया।

मुख मुरली बजाय गयो साँवरिया।

सखि रास रचाय गयो साँवरिया।

मारि काँकरिया फोरे गागरिया।

वाके संग करोरन नागरिया।

वाको लखि सखि ह्वै गईं बावरिया।

मैंने वाई सों फेरि लई भाँवरिया।

Source page 57

मोहिं प्यारी कही गलि साँकरिया।

मैंने हाँ करिया ना ना करिया।

मोहिं सोती जगाय गयो साँवरिया।

मेरे चित्त को चुराय गयो साँवरिया।

मोहिं रोना सिखाय गयो साँवरिया।

वो करके दृगन जनु काँकरिया।

वाने फोरी अविद्या गागरिया।

मैंने वाई पै छोड़ि दइ नावरिया।

मोहिं अपनी बनाय गयो साँवरिया।

मैं तो पारस पाय गयो साँवरिया।

पायो रतन अमोलक साँवरिया।

बिनु मोल मोल लिए साँवरिया।

मैं तो जित देखूँ तित साँवरिया।

मेरे पाछे पाछे डोलत साँवरिया।

वाको सब अँग सुन्दर तनु करिया।

दीवानी वाकी कोटिन नागरिया।

मैं “कृपालु” सुभाउ पै बावरिया।

ब्रज रस माधुरी · भाग १050
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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