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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 19 · 43/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 19 · Kirtan 19

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

13 source linesपुस्तक पृष्ठ 48PDF 69

बलिहार ब्रजेन्द्रकुमार, तेरी महिमा अपरम्पार।

(हरे राम श्री -महाराज जी)

बलिहार ब्रजेन्द्रकुमार, तेरी महिमा अपरम्पार।

कह निराकार श्रुति चार, कत नराकार तनु धार?

तुम तो कह वेद पुकार, हौं पितु अनादि संसार।

पुनि को लग नंद तिहार, कत सब कह नन्दकुमार?

बिनु शरण न हो उद्धार, यह कह तुम बारम्बार।

पुनि गरल पिवावनिहार, कत दिए पूतनहिं तार?

तोहिं आत्माराम पुकार, सब शास्त्र वेद सरकार।

पुनि कत बनि कुबरिहुँ यार, किय श्रुति विरुद्ध व्यवहार?

तुम महाकाल भरतार, अस कह श्रुति संत पुकार।

पुनि जरासंध डर यार, कत भजि गयो सागर पार?

तुम मदनहुँ मोहन हार, यह जानत सब संसार।

पुनि कत “कृपालु” सरकार, इत रिस शूर्पणखहिं नार?

ब्रज रस माधुरी · भाग १043
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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