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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 43 · 67/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 43 · Kirtan 43

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 102–103PDF 123–124

श्यामा माँ जो तेरी, पद रज ही मिलि जाये।

(ओ माँ श्यामा...)

श्यामा माँ जो तेरी, पद रज ही मिलि जाये।

संसार की कौन कहे, मन मुक्तिहुँ ठुकराये॥

जा पद रज पावन को, ब्रह्मादि तरसते हैं।

वा पद रज को पाकर, लालहुँ बलि बलि जाये॥

Source page 103

इस दासी की श्यामा, बस इक अभिलाषा है।

सेवा के सिवा कोई, इच्छा नहिँ रहि पाये॥

तुम्हरी महिमा श्यामा, श्यामहुँ नहिं जानि सके।

धरि रूप अनंत थके, नहिं ओर छोर पाये॥

कोउ साधन बल तुम्हरी, पदरज नहिँ पाइ सके।

बिनु हेतु “कृपालु” तुम्हें, तुम्हरे जन बतलाये॥

भजें गोविंद गोविंद राधे। भजें गोविंद राधे राधे।

भजें गोपिन गोविंद राधे। भज गोपी गोविंद राधे।

सब जीवन जीवन राधे, सब जीवन जीवन राधे।

जीवन जीवन नँदनंदन नँदनंदन जीवन राधे।

बरसाने वारी प्यारी, प्यारी अति प्यारी प्यारी।

पिय प्रानन प्यारी प्यारी, सोरह सिंगार युत प्यारी।

मेरी गोरी गोरी प्यारी, मेरी भोरी भोरी प्यारी।

मेरी नित्य किशोरी प्यारी, मेरी पिय चित चोरी प्यारी।

प्यारी है ऐसी प्यारी, प्यारीहुँ मोहें लखि प्यारी।

प्यारी सम प्यारी प्यारी, जय हो बलिहारी प्यारी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १067
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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