कीर्तन 1–50
कीर्तन 43 · Kirtan 43
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्यामा माँ जो तेरी, पद रज ही मिलि जाये।
श्यामा माँ जो तेरी, पद रज ही मिलि जाये।
संसार की कौन कहे, मन मुक्तिहुँ ठुकराये॥
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इस दासी की श्यामा, बस इक अभिलाषा है।
सेवा के सिवा कोई, इच्छा नहिँ रहि पाये॥
तुम्हरी महिमा श्यामा, श्यामहुँ नहिं जानि सके।
धरि रूप अनंत थके, नहिं ओर छोर पाये॥
कोउ साधन बल तुम्हरी, पदरज नहिँ पाइ सके।
बिनु हेतु “कृपालु” तुम्हें, तुम्हरे जन बतलाये॥
भजें गोविंद गोविंद राधे। भजें गोविंद राधे राधे।
भजें गोपिन गोविंद राधे। भज गोपी गोविंद राधे।
सब जीवन जीवन राधे, सब जीवन जीवन राधे।
जीवन जीवन नँदनंदन नँदनंदन जीवन राधे।
बरसाने वारी प्यारी, प्यारी अति प्यारी प्यारी।
पिय प्रानन प्यारी प्यारी, सोरह सिंगार युत प्यारी।
मेरी गोरी गोरी प्यारी, मेरी भोरी भोरी प्यारी।
मेरी नित्य किशोरी प्यारी, मेरी पिय चित चोरी प्यारी।
