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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 79 · 103/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 79 · Kirtan 79

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

22 source linesपुस्तक पृष्ठ 149–150PDF 170–171

श्री राधेरानी मेरी ठकुरानी, विराजें वृन्दावन रजधानी।

(नित सेवा माँगूँ...)

श्री राधेरानी मेरी ठकुरानी, विराजें वृन्दावन रजधानी।

श्री राधेरानी अवढर दानी, लुटावें ब्रज रस मनमानी।

Source page 150

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, दिवानी जाकी ब्रह्माणीभवानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, कोटि कमला नौकरानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, पखारें पग बानी भवानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, पखारें पग शिव औ शिवानी।

श्री राधेरानी ऐसी महरानी, बनायो शिवहूँ को शिवानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, न गिन सक गुनगन ज्ञानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, खरे ब्रज तरु बनि ज्ञानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, हरिहुँ महिमा नहिं जानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, पलोटें पग साँरगपानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, करें ठाकुर अगवानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, मनावें हरि दृग भरि पानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, लखत सुधि मुरलि भुलानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, हरिहुँ ठकुराई भुलानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, नचायो हरि अँगुरिन पानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, रुलायो जो रह सुख खानी।

श्री राधेरानी ऐसी महरानी, भिखारी बने त्रिभुवन दानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, आत्मा निज हरि मानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, हरिहुँ निज स्वामिनि मानी।

श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, “कृपालुहुँ” स्वामिनि मानी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १103
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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