कीर्तन 51–100
कीर्तन 79 · Kirtan 79
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधेरानी मेरी ठकुरानी, विराजें वृन्दावन रजधानी।
Source page 150
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, दिवानी जाकी ब्रह्माणीभवानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, कोटि कमला नौकरानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, पखारें पग बानी भवानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, पखारें पग शिव औ शिवानी।
श्री राधेरानी ऐसी महरानी, बनायो शिवहूँ को शिवानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, न गिन सक गुनगन ज्ञानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, खरे ब्रज तरु बनि ज्ञानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, हरिहुँ महिमा नहिं जानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, पलोटें पग साँरगपानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, करें ठाकुर अगवानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, मनावें हरि दृग भरि पानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, लखत सुधि मुरलि भुलानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, हरिहुँ ठकुराई भुलानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, नचायो हरि अँगुरिन पानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, रुलायो जो रह सुख खानी।
श्री राधेरानी ऐसी महरानी, भिखारी बने त्रिभुवन दानी।
श्री राधेरानी ऐसी ठकुरानी, आत्मा निज हरि मानी।
