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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 50 · 74/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 50 · Kirtan 50

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

13 source linesपुस्तक पृष्ठ 115PDF 136

पिय प्यारी वृषभानुदुलारी,

(दीनानाथ मोहिं काहे बिसारे)

पिय प्यारी वृषभानुदुलारी,

सोइ मम स्वामिनि श्यामा प्यारी।

महल टहल दे दो सुकुमारी,

पुनि पुनि दैहौं महल बुहारी।

क्रन्दन सुनत नाहिं बनवारी,

तुम ही सुनु बरसाने वारी।

तुम्हरी बिनु अनुकम्पा प्यारी,

शरण गह्यो कहु कौन तिहारी।

तुम करुणामयी मातु हमारी,

जगहुँ निठुर नहिं हो महतारी।

तुम “कृपालु” सरकार हमारी,

करहु कृपा अब हमरिहिं बारी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १074
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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