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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 92 · 116/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 92 · Kirtan 92

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

19 source linesपुस्तक पृष्ठ 170PDF 191

जय जय निज छवि पर हरि वारी,

(ठाकुर युगल किशोर...)

जय जय निज छवि पर हरि वारी,

जय जय हँस प्यारी दै तारी।

जय जय धनि धनि सोई ब्रजनारी,

जय जय अस्तुति कर हरि गारी।

जय जय इक हरि द्वै तनुधारी,

जय जय इक प्रियतम इक प्यारी।

जय जय प्रियतम भज नित प्यारी,

जय जय प्यारिहुँ भज बनवारी।

जय जय दिय गल बहिँयन जोरी,

जय जय देहु दिठौना गोरी।

जय जय दोउ ठाकुर दोउ चाकर,

जय जय कोउ न जान गति जाकर।

जय जय श्याम गौर वर जोरी,

जय जय किंकरि करु बरजोरी।

जय जय जुग जुग जीवहु जोरी,

जय जय नवल किशोर किशोरी।

जय जय दोउ “कृपालु” मम ठाकुर,

जय जय सुन मन इनहिंन ला उर॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १116
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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