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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 75 · 99/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 75 · Kirtan 75

Radha meri thakurani, Vrindavan rajdhani · Roman pronunciation · site label

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

23 source linesपुस्तक पृष्ठ 144–145PDF 165–166

राधा मेरी ठकुरानी, वृन्दावन रजधानी।

(राधा मेरी गति मति)

राधा मेरी ठकुरानी, वृन्दावन रजधानी।

राधा मेरी ठकुरानी, मैं तो राधा की दीवानी।

राधा मेरी रसखानी, मैं तो राधा की दीवानी।

राधा ब्रजरस खानी, मैं तो राधा की दीवानी।

राधा मेरी ठकुरानी, ब्रह्म करें अगवानी।

राधा मेरी ठकुरानी, हा हा खायँ चक्रपानी।

राधा मेरी ठकुरानी, वृन्दावन महरानी।

राधा मेरी ठकुरानी, अपनावो दासी मानी।

राधा मेरी ठकुरानी, रसिक कृपा ते जानी।

राधा मेरी ठकुरानी, त्यागी लोक वेद कानी।

Source page 145

राधा मेरी ठकुरानी, ध्यावें योगी ज्ञानी ध्यानी।

राधा मेरी ठकुरानी, पाँचों मुक्ति भरें पानी।

राधा मेरी ठकुरानी, भोरे कहें बौरानी।

राधा मेरी ठकुरानी, सेवें उमा रमा वानी।

राधा मेरी ठकुरानी, मुक्तिदानीहूँ को दानी।

राधा मेरी ठकुरानी, सेवें शंभु शुक ज्ञानी।

राधा मेरी ठकुरानी, ज्ञानी विज्ञानी अज्ञानी।

राधा मेरी ठकुरानी, ऊँचे महलन रानी।

राधा मेरी ठकुरानी, नेति कहे वेद वानी।

राधा मेरी ठकुरानी, स्वामिनि “कृपालु” मानी।

राधा मेरी गति मति, राधा पद मेरी रति।

राधा पति मेरी गति, वारौं कोटि रति पति।

ब्रज रस माधुरी · भाग १099
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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