कीर्तन 101–150
कीर्तन 123 · Kirtan 123
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्यामा ही हैं श्याम अरु श्याम ही हैं श्यामा,
श्यामा ही हैं श्याम अरु श्याम ही हैं श्यामा,
श्यामा श्याम विहरत वृन्दावन धामा।
श्याम तनु नीलो रंग, पीलो रंग श्यामा,
श्याम धारें पीलो पट, नीलो पट श्यामा।
श्यामा रँगी श्याम रँग, श्याम रँगे श्यामा,
दोउ रोम रोम बसें, दोउ श्याम श्यामा,
श्यामा प्राणधन श्याम, श्याम प्राण श्यामा,
मेरो प्राणधन दोउ श्याम अरु श्यामा।
कोउ कहे श्याम बड़ो, कोउ कहे श्यामा,
मेेरे भायें दोनों एक श्याम अरु श्यामा।
आत्माराम पूर्णकाम दोउ श्याम श्यामा,
जो भी माँगे वाको देयँ प्रेम निष्कामा।
Source page 226
प्रेम रूप रस सिंधु, दोउ श्याम श्यामा,
जो भी प्यासा माँगे वाको देयँ बिनु दामा।
श्यामा पियें श्यामानन्द, श्यामानन्द श्यामा,
श्यामा रटें श्याम श्याम, श्याम रटें श्यामा।
