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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 123 · 147/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 123 · Kirtan 123

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

25 source linesपुस्तक पृष्ठ 225–226PDF 246–247

श्यामा ही हैं श्याम अरु श्याम ही हैं श्यामा,

(परिक्रमा)

श्यामा ही हैं श्याम अरु श्याम ही हैं श्यामा,

श्यामा श्याम विहरत वृन्दावन धामा।

श्याम तनु नीलो रंग, पीलो रंग श्यामा,

श्याम धारें पीलो पट, नीलो पट श्यामा।

श्यामा रँगी श्याम रँग, श्याम रँगे श्यामा,

ब्रजरस बरसावत ब्रज धामा।

दोउ रोम रोम बसें, दोउ श्याम श्यामा,

रास करत दोउ सँग ब्रज भामा।

श्यामा प्राणधन श्याम, श्याम प्राण श्यामा,

मेरो प्राणधन दोउ श्याम अरु श्यामा।

कोउ कहे श्याम बड़ो, कोउ कहे श्यामा,

मेेरे भायें दोनों एक श्याम अरु श्यामा।

आत्माराम पूर्णकाम दोउ श्याम श्यामा,

जो भी माँगे वाको देयँ प्रेम निष्कामा।

प्रेम रस सिंधु रूप श्याम अरु श्यामा,

ज्ञानी पियें क्षार सिंधु जल विधि बामा।

Source page 226

प्रेम रूप रस सिंधु, दोउ श्याम श्यामा,

जो भी प्यासा माँगे वाको देयँ बिनु दामा।

श्यामा पियें श्यामानन्द, श्यामानन्द श्यामा,

श्यामा रटें श्याम श्याम, श्याम रटें श्यामा।

दोउ दोउ सुख हित आठहुँ यामा,

झगरत नित प्रति येहि ब्रजधामा।

श्यामा पावें श्याम रस, श्याम पावें श्यामा,

हौं “कृपालु” पावूँ रस श्याम अरु श्यामा॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १147
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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