लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART I · Front matter · 6/240

प्रारम्भिक पृष्ठ

मार्गदर्शन · Guidance

12 source linesप्रारम्भिक पृष्ठPDF 8

जगद्गुरु-आदेश

श्री कृष्ण का माधुर्य-भाव युक्त निष्काम प्रेम प्राप्त कर उनकी नित्य सेवा ही तुम्हारा लक्ष्य है।

वह दिव्य निष्काम प्रेम, गुरुकृपा द्वारा अंतःकरण-शुद्धि होने पर ही प्राप्त होगा।

वह अंतःकरण शुद्धि, गुरु द्वारा निर्दिष्ट साधना द्वारा ही संभव है।

साधना - श्री राधाकृष्ण का रूपध्यान करते हुये (स्वेच्छा से बनाये हुये रूप में दिव्य-भावना रखना है) रोकर उनके नाम गुण लीलादि का संकीर्तन करो।

सदा श्रीकृष्ण को अपने साथ ही मानो।

मोक्ष पर्यन्त की कामना छोड़कर, केवल दिव्य शुद्ध प्रेम की कामना से ही प्रेम करो।

“वे ही मेरे हैं”, इस भावना को निरंतर दृढ़ करो, एवं श्याममिलन की परमव्याकुलता पैदा करो।

परदोष दर्शनादि कुसंगों से बचो।

मानवदेह का प्रत्येक क्षण अमूल्य मानो।

- मैं सदा तुम्हारा सहायक हूँ -

तुम्हारा

कृपालु

हस्तलिखित मूल से प्रतिलिपि; मूल पृष्ठ भी उपलब्ध है।
जगद्गुरु-आदेश — मूल हस्तलिखित स्रोत पृष्ठ
ब्रज रस माधुरी · भाग १006
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text