कीर्तन 151–200
कीर्तन 170 · Kirtan 170
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय।
धरे गोपिका भेष महेश, कृष्ण प्रेम दे दो लवलेश।
तुम्हरी कृपा कोर लवलेश, हौंहूँ पइहौं रास प्रवेश।
सुन लो भोलेनाथ उमेश, मुक्ति न चह, चह प्रेम ब्रजेश।
मंगलभवन अमंगल भेष, मोहूँ लै चलु सोइ ब्रज देश।
करौं टहल निशिदिन राधेश, उर न रहे निज सुख लवलेश।
