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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 170 · 194/240

कीर्तन 151–200

कीर्तन 170 · Kirtan 170

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

10 source linesपुस्तक पृष्ठ 264PDF 285

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय।

(रघुपति राघव...)

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय।

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय॥

धरे गोपिका भेष महेश, कृष्ण प्रेम दे दो लवलेश।

तुम्हरी कृपा कोर लवलेश, हौंहूँ पइहौं रास प्रवेश।

सुन लो भोलेनाथ उमेश, मुक्ति न चह, चह प्रेम ब्रजेश।

मंगलभवन अमंगल भेष, मोहूँ लै चलु सोइ ब्रज देश।

करौं टहल निशिदिन राधेश, उर न रहे निज सुख लवलेश।

सिखवहु तांडव नृत्य विशेष, नाचि नाचि रिझवहुँ प्राणेश।

तुम अवढर दानी विश्वेश, करहु “कृपालुहिं” कृपा उमेश॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १194
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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