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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 18 · 42/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 18 · Kirtan 18

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

14 source linesपुस्तक पृष्ठ 47–48PDF 68–69

मेरे प्रानन प्यारे आजा, मेेरे नैनन तारे आजा।

ओ अज आज आजा ब्रज आजा, पुनि ब्रज ब्रजरस बरसा जा।

मेरे नंददुलारे आजा, मेरे मुरली वारे आजा।

मेरे कनुआ कारे आजा, मेरे कामरि वारे आजा।

मेरे तन मन प्राण समा जा, मेरे उर विरहाग लगाजा।

मेरे मन के राजा आजा, मेरे मन भा जा तन छाजा।

मेरे नैनन बीच समा जा, फिर भूलेहुँ कबहूँ ना जा।

मेरे श्याम सलोने आजा, उर ऐसो आ पुनि ना जा।

मेरे मोहन प्यारे आजा, मेरी माखन रोटी खाजा।

मेरी बिगरी बात बना जा, टुक मुरली मधुर बजाजा।

Source page 48

मेरे सहज सनेही आजा, निज चिन्मय रूप दिखाजा।

कुबरी घर वारे आजा, मोहिं प्रेम पयोधि डुबाजा।

मेरे रसिकन प्यारे आजा, मोहिं प्रीति की रीति सिखाजा।

सीने से मोहिं लगा जा, मोहूँ “कृपालु” अपनाजा।

ब्रज रस माधुरी · भाग १042
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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