कीर्तन 1–50
कीर्तन 18 · Kirtan 18
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरे प्रानन प्यारे आजा, मेेरे नैनन तारे आजा।
ओ अज आज आजा ब्रज आजा, पुनि ब्रज ब्रजरस बरसा जा।
मेरे नंददुलारे आजा, मेरे मुरली वारे आजा।
मेरे कनुआ कारे आजा, मेरे कामरि वारे आजा।
मेरे तन मन प्राण समा जा, मेरे उर विरहाग लगाजा।
मेरे मन के राजा आजा, मेरे मन भा जा तन छाजा।
मेरे नैनन बीच समा जा, फिर भूलेहुँ कबहूँ ना जा।
मेरे श्याम सलोने आजा, उर ऐसो आ पुनि ना जा।
Source page 48
मेरे सहज सनेही आजा, निज चिन्मय रूप दिखाजा।
कुबरी घर वारे आजा, मोहिं प्रेम पयोधि डुबाजा।
