कीर्तन 51–100
कीर्तन 83 · Kirtan 83
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
हमारो धन राधा राधा राधा राधा राधा,
श्री राधे जू की शरण न एकहुँ बाधा। हमारो धन....।
श्री राधे जू हैं छवि निधि प्रेम अगाधा। हमारो धन....।
श्री राधा बिनु चैन न पल छिन आधा। हमारो धन....।
Source page 156
प्रेम पथ भुक्ति मुक्ति दोउ बाधा। हमारो धन....।
श्रुतिन को सार तत्त्व हैं राधा। हमारो धन....।
छुपायो शुक सार भागवत राधा। हमारो धन....।
सच्चिदानंद कंद हैं राधा। हमारो धन....।
ह्लादिनी सार सार हैं राधा। हमारो धन....।
भाव मादन रूपा हैं राधा। हमारो धन....।
कृष्णहूँ चित कर्षण कर राधा। हमारो धन....।
श्री राधे जू को रूपध्यान उर साधा। हमारो धन....।
हमारे रोम रोम में राधा। हमारो धन....।
कृष्ण भाजत ऐहैं भजु राधा। हमारो धन....।
श्री राधेजू को भाये भोला भाला सीधा सादा। हमारो धन....।
श्री राधा भजु करु न नाम अपराधा। हमारो धन राधा..।
आत्मा परमात्मा की राधा। हमारो धन....।
ब्रह्म हैं पद नखमणि दुति राधा। हमारो धन....।
श्री राधा राधा राधा राधा हरि अवराधा। हमारो धन....।
मुरलि महँ गावत हरि गुन राधा। हमारो धन....।
श्री राधावर भजत नाम सुनि राधा। हमारो धन....।
Source page 157
कहत “रा” मुर्छित हरि कह ना “धा”। हमारो धन....।
श्री राधा तजि भजत श्याम अपराधा। हमारो धन....।
कृष्ण कहु पाछे प्रथम कहु राधा। हमारो धन....।
कृष्ण को रसिक बनायो राधा। हमारो धन....।
लखत रह सभय श्याम भौं राधा। हमारो धन....।
प्रिया हित निरतत धिर किट धा धा। हमारो धन....।
कृष्ण को नचवति अँगुरिन राधा। हमारो धन....।
न पायो पार हरिहुँ सोइ राधा। हमारो धन....।
