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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 100 · 124/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 100 · Kirtan 100

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 186–187PDF 207–208

हरे राम (महाराज जी)

बलिहार युगल सरकार, हमरिहुँ ओर निहार।

तुम मात पिता भरतार, हम सेवक सदा तिहार।

Source page 187

तुम पतितन को रखवार, हम पतितन को सरदार।

तुम दीनबंधु सरकार, हम अहंकार अवतार।

तुम करुणा को भंडार, हम याचक याचत प्यार।

तुम ही मम नातेदार, हौं अब न चहौं संसार।

तुम देत पदारथ चार, हम चहत प्रेम उपहार।

तुम कृपा करहु इक बार, हम दउँ तोहिँ प्राणहुँ वार।

तुम जाको चह सरकार, बस सोइ सुहागिनि नार।

तुम त्रिभुवन मोहनहार, मोहूँ मोहहु सरकार।

तुम साँचो मीत हमार, बरबस अपना लो यार।

तुम तनु कुबरी को यार, हम परम कुटिल मन धार।

तुम देत अकारन प्यार, हम येहि आशा तनु धार।

तुम मातु अनादि हमार, हम शिशु पिवाय रसधार।

तुम कहँ प्रिय करुण पुकार, हम अति कर्कश मन धार।

तुम ही अवलंब हमार, हम निरवलंब सरकार।

तुम कर नित पर उपकार, हम मानत नहिँ आभार।

तुम दोउ एकहिं अवतार, निज जन हित द्वै तनु धार।

गति दीन पूतनहिं नार, अस को उदार अवतार।

तुम मम “कृपालु” आधार, हम जानत नाहिँ गमार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १124
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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