कीर्तन 51–100
कीर्तन 65 · Kirtan 65
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जय वृंदाविपिन बिहारी, जय श्री बरसाने वारी।
जय वृंदाविपिन बिहारी, जय श्री बरसाने वारी।
वारी वारी कुंजबिहारी, वारी वारी भानुदुलारी।
मेरो धन नँदनदंन बनवारी, तन मन धन उन पर वारी।
मेरी स्वामिनि भानुदुलारी, प्यारी बरसाने वारी।
मैं तो उन प्यारी पर वारी, जा पर वारी बनवारी।
