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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 53 · 77/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 53 · Kirtan 53

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 118–119PDF 139–140

प्यारी प्यारी की जय, सुकुमारी की जय।

(राधेरानी की जय ...)

प्यारी प्यारी की जय, सुकुमारी की जय।

वृषभानुदुलारी की जय जय जय।

गहवरवन वारी की जय जय जय।

बरसाने वारी की जय जय जय।

बोलो ब्रजरस वारी की जय जय जय।

अति भोरी भारी की जय जय जय।

सिर चूनरि वारी की जय जय जय।

नथ बेसर वारी की जय जय जय।

मृदु मुसुकनि वारी की जय जय जय।

श्रुति कुण्डल वारी की जय जय जय।

उर कंचुकि वारी की जय जय जय।

नीलाम्बर वारी की जय जय जय।

कटि किंकिनि वारी की जय जय जय।

पग पायल वारी की जय जय जय।

Source page 119

बिछुवनि छवि वारी की जय जय जय।

प्राणप्यारी “कृपालु” की जय जय जय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १077
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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