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श्री गुरवे नमः
[अस्पष्ट] श्याम रस,
[अस्पष्ट] गौर।
[अस्पष्ट] रस की बनी,
[अस्पष्ट] दोउ रस निचोर॥
गुरुचरण शरण गहु,
भजु श्री युगलकिशोर।
[अस्पष्ट] कृपालु हरि कृपा ते,
लहु प्रेम चितचोर॥
कृपालु
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