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ब्रज रस माधुरी

PART I · Prayers and aartis · 13/240

प्रार्थना एवं आरती

आरती · Aarti

22 source linesपुस्तक पृष्ठ 11–12PDF 32–33

श्री कृष्ण जी की आरती

आरती आरति-हारी की, कि वृन्दाविपिन बिहारी की

बँधी सिर तिरछी सी पगड़ी,

जड़ी मणि-मुक्तन मुुकुट लड़ी,

अड़ी अड़बंग मोर- पँखुड़ी,

मुकुट की लटक, भृकृटि की मटक, लकुटि की अटक,

चटक केशर छवि न्यारी की॥ 1॥

Source page 12

नाक बिच भल बुलाक हलकै,

कान कुण्डल झलमल झलकै,

दृगंचल चंचल रस छलकै,

अलक की हलक, पलक की छलक, कलक की झलक,

ललक देखन छवि प्यारी की॥ 2॥

सुघर उपरैना उर राजै,

पीत पट अटपट छवि छाजै,

काछनी नट सी कटि भ्राजै,

नैन गति मैन, सैन अति पैन,बैन रति दैन,

लैन मति ब्रज नर नारी की॥ 3॥

पाणि मणिमय कंकण सोहै,

कनक-किंकिनि-धुनि मन मोहै,

अनूपम की उपमा को है,

नन्द आनन्द,कन्द-आनन्द,सच्चिदानन्द,

“कृपालु”,चन्द-तनु-कारी की॥ 4॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १013
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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