कीर्तन 1–50
कीर्तन 34 · Kirtan 34
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
आजा आजा दरस दिखा जा, आजा बरसाने वारी।
आजा आजा दरस दिखा जा, आजा बरसाने वारी।
तू तो रह मम उर महँ प्यारी, बाहर आजा सुकुमारी।
आँख मिचौनी तजि दे प्यारी, सीधे सीधे आ प्यारी।
होजा प्रकट रँगीली महलनि, ब्रज रस बरसाने वारी।
आजा चुपके ते सुकुमारी, काहुहिं नहिं कहिहौं प्यारी।
आजा दरसन परसन तरसति, तेरी कीरति महतारी।
आजा भानु भूप की गोदी सूनी है तुम बिन प्यारी।
आजा आने वाले ही हैं तेरे प्रियतम बनवारी।
आजा अइहैं पद सेवाहित, चाकर बन कर गिरिधारी।
आजा ललितादिक सखि परखत, जो तेरी प्रानन प्यारी।
Source page 71
आजा दुध दँतुलिन दिखरा जा, आजा बरसाने वारी।
आजा तोतरि बोल सुना जा, आजा बरसाने वारी।
आजा लतन पतन तन धरि धरि, जइहैं ज्ञानिन बलिहारी।
आजा मोर कुटी वारी, हौं “कृपालु” वारी वारी।
जय जय रस बरसाने वारी, जय जय बरसाने वारी।
जय जय महाभाव रसवारी, जय जय नथ बेसर वारी।
जय जय प्रानहुँ ते प्यारी, जय जय प्यारी बलिहारी।
जय जय मोहन मोहिनी प्यारी, जय जय अति भोरी प्यारी।
पतित पावनी तुम बिनु प्यारी, कोउ नहिं है त्रिभुवन प्यारी।
भली बुरी जैसी हूँ प्यारी, हूँ तो तेरी सुकुमारी।
तोहिं तजि जाऊँ कित सुकुमारी, पता बता दे मम प्यारी।
तू तो थी बिनु हेतु सनेहिनि, अब क्यों निठुर भईं प्यारी।
ब्रजरस बूँद पिला दे प्यारी, घटे न कछु तव सुकुमारी।
